बरेली। नियमित देखरेख के अभाव में जर्जर हो रहे तीन सौ बेड अस्पताल में बुधवार को इमरजेंसी की ओर छत की फाल सीलिंग भरभराकर गिर गई। गनीमत रही कि हादसे के समय कोई वहां मौजूद नहीं था।
निर्माण कार्य पूरा हुए करीब छह वर्ष बीतने के बाद भी अब तक तीन सौ बेड अस्पताल का संचालन शुरू नहीं हुआ। दूसरी ओर, नियमित देखरेख के अभाव में अब भवन भी जर्जर होने लगा है। अस्पताल के स्टाफ के मुताबिक सुबह करीब आठ बजे अस्पताल खुला तो डेंगू डेडिकेटेड इमरजेंसी वार्ड के बाहर की फाल सीलिंग गिरी हुई थी।
तत्काल इसकी सूचना मौजूद चिकित्सकों को दी गई। जिन्होंने प्रभारी सीएमएस को घटना की जानकारी दी। बता दें कि अस्पताल के एक हिस्से में ओपीडी संचालित है। मरीज अस्पताल में डॉक्टर के पहुंचने से पहले ही पर्चा बनवाने के लिए पहुंच जाते हैं।
सीएमएस डॉ. इंतजार हुसैन ने कहा कि भवन की मरम्मत की जिम्मेदारी फिलहाल राजकीय निर्माण निगम के पास है। बृहस्पतिवार से मरम्मत का कार्य शुरू हो जाएगा। वहीं, परिसर के अन्य वार्ड और बरामदे में लगी फाल सीलिंग की भी जांच कराई जाएगी।
परिसर में हो रहा जलभराव, दीवारों पर सीलन
तीन सौ बेड अस्पताल का निर्माण करीब 86 करोड़ से हुआ है। अस्पताल में जगह-जगह जलभराव से मरीजों को परेशानी होती है। फाल सीलिंग गिरने के बाद अब छत से रिस-रिस कर आ रहा पानी फर्श पर बिखर रहा है। जलभराव की स्थिति है। फर्श पर पानी होने से फिसलन बढ़ गई है। चार वर्ष पूर्व हस्तांतरण के दौरान खामियां दूर करने को कहा गया था पर राजकीय निर्माण निगम की ओर से ठोस पहल नहीं हुई। पूर्व में डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक समेत तत्कालीन जिलाधिकारी शिवाकांत द्विवेदी और वर्तमान जिलाधिकारी रविंद्र कुमार ने भी अस्पताल का निरीक्षण किया था। दीवारों पर सीलन होने पर नाराजगी जताई थी। अमर उजाला ब्यूरो