बरेली। जिला अस्पताल प्रशासन को पहले से पता था कि अस्पताल का निरीक्षण होना है, फिर भी तय कार्यक्रम के तहत शुक्रवार की सुबह गंगा मॉनिटरिंग कमेटी जिला महिला अस्पताल पहुंची तो वहां का हाल देखकर हैरान रह गई। कूड़ेदान कई दिनों के कूड़े से न सिर्फ ठसाठस भरे हुए थे बल्कि कूड़ा उनसे बाहर निकलकर आसपास बिखरा तक पड़ा था। यही नहीं अलग-अलग किस्म के कूड़े के लिए अलग-अलग कूड़ेदान जरूर रखे हुए थे लेकिन सभी में हर तरह का कूड़ा पड़ा हुआ था। पैथॉलॉजी लैब में इस्तेमाल किए जाने वाले ग्लब्स को भी इस्तेमाल करने के बाद इधर-उधर फेंक दिया गया था। लैब के आसपास असहनीय बदबू फैली हुई थी। कमेटी के सदस्यों ने इस पर सख्त नाराजगी जताई तब कहीं अफसर हरकत में आए। सीएमओ डॉ. विनीत शुक्ला ने सफाई कर्मचारियों पर कार्रवाई का निर्देश दिया है।
गंगा मॉनीटरिंग कमेटी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति अरुण टंडन और सदस्य डॉ. अनीता राय सुबह करीब 9:45 बजे जिला महिला अस्पताल पहुंचे। सीएमओ डॉ. विनीत शुक्ला और महिला सीएमएस डॉ. अलका शर्मा को साथ लेकर टीम जैसे ही महिला अस्पताल में घुसी तो उसकी गंदे पड़े कूड़ेदान पर पड़ी। न्यायमूर्ति अरुण टंडन और डॉ. अनीता राय ने नाराजगी जताते हुए खुद ही डस्टबिन खोलकर देखा तो पाया कि वह ठसाठस भरा हुआ है। साफ था कि कूड़ेदान में पुराना कूड़ा भरा हुआ था और उसे साफ नहीं किया गया था। टीम यहां से लेबर रूम, पैथोलॉजी लैब, ओटी, एएनसी रूम और वार्डों में पहुंचीं। सीएलआर यानी कॉमन लेबर रूम में भी बॉयो मेडिकल वेस्ट के निस्तारण के लिए रखे तीनों कूड़ेदानों के बाहर कूड़ा बिखरा हुआ था। टीम ने इस पर फिर नाराजगी जताई। पीले डस्टबिन का ढक्कन खोलकर देखा तो उसमें केले के छिलके पड़े मिले।
टीम को पैथोलॉजी लैब में इस्तेमाल किए गए ग्लब्स इधर-उधर पड़े मिले तो उन्होंने सीएमएस डॉ. अलका शर्मा को तुरंत उनका निस्तारण कराने के आदेश दिए। पैथोलॉजी लैब के बाहर भीषण बदबू फैली हुई थी। इसी दौरान टीम को एक मरीज रैंप के किनारे खाली जगह में खिड़की से कूड़ा फेंकते मिला तो उसकी नजर दीवार किनारे इकट्ठे कूड़े के ढेरों पर भी पड़ गई। न्यायमूर्ति ने इस पर भी नाराजगी जताई। उन्होंने सीएमओ डॉ. विनीत शुक्ला को सफाई कर्मचारियों पर कार्रवाई करने के निर्देश दिए। टीम की नाराजगी जताने पर सीएमएस डॉ. अलका शर्मा को बार-बार सफाई देनी पड़ी।
जिला अस्पताल का हाल.. जब न्यायमूर्ति को नाक पर रखना पड़ा रुमाल
जिला महिला अस्पताल का निरीक्षण करके लौट रही टीम ने ओपीडी की लाइन में लगे कुछ मरीजों से बात की तो उन्होंने अस्पताल की अव्यवस्थाओं की पोल खोलकर रख दी। मरीजों ने टॉयलेट और बिल्डिंग के पीछे बेहद गंदगी होने की शिकायत की तो टीम के सदस्य खुद ही टॉयलेट तक जा पहुंचे। वहां गंदगी के साथ इतनी भीषण बदबू फैली हुई थी कि टीम को वहां एक मिनट भी खड़ा होना मुश्किल हो गया। न्यायमूर्ति अरुण टंडन और डॉ. अनीता राय नाक पर रुमाल रखने को मजबूर हो गए। उन्होंने सीएमएस को तुरंत इस पर कार्रवाई के निर्देश दिए गए। हालात न सुधरने पर टीम अस्पताल प्रशासन के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी भी देकर गई।
मिशन अस्पताल में भी मिलीं कई खामियां
गंगा मॉनिटरिंग कमेटी ने जिला महिला अस्पताल से पहले मिशन अस्पताल का निरीक्षण किया। यहां भी टीम को तमाम खामियां मिलीं। अस्पताल में सीवेज ट्रीटमेंट और एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट न देखकर टीम ने इसका कारण पूछा तो कोई जवाब नहीं दे पाया। अस्पताल प्रबंधन के लोग बगलें झांकते रह गए। टीम ने अस्पताल प्रशासन को जल्द ही दोनों प्लांट लगवाने का आदेश दिया।
फैक्ट्रियों में भी एनजीटी के आदेश ताक पर
जिला महिला अस्पताल का निरीक्षण करने के बाद टीम ने सीबीगंज के इंडस्ट्रियल एरिया में फैक्ट्रियों का निरीक्षण किया। यहां भी उसका पूरा समय खामियां गिनते हुए गुजरा। ज्यादातर फैक्ट्रियों में न एसटीपी प्लांट मिले न ईटीपी प्लांट। टीम ने कैंफर फैक्टरी से निकलने वाले आउटलेट से पानी का सैंपल लिया। सुपीरियर फैक्टरी से लगून (पूल जहां फैक्टरी के गंदे पानी का ट्रीटमेंट किया जाता है) से सैंपल भरा। फतेहगंज पश्चिमी क्षेत्र स्थित शंखा नदी के पानी का सैंपल भी लिया गया।
गंगा स्वच्छता के लिए निरीक्षण करने निकली है कमेटी
गंगा नदी का प्रदूषण समाप्त करने और नदी को पुनजीर्वित करने के लिए ‘नमामि गंगे’ मिशन शुरू किया था। 2019-2020 तक केंद्र सरकार ने गंगा की सफाई पर 20 हजार करोड़ रुपये की कार्य योजना को मंजूरी दी है। इसके तहत ही विभिन्न नदियों, उद्योगों और नालों के जरिये गंगा तक पहुंचने वाले अपशिष्ट को रोकने पर काम किया जा रहा है। इसके तहत ही निगरानी के लिए गठित कमेटी नदी, फैक्टरी से निकलने वाले अपशिष्ट और अस्पतालों से निकलने वाली पानी और उसके शोधन के इंतजामों का परीक्षण कर रही है।