सार्वजनिक मंचों पर ‘माननीय’ मोदी सरकार के ‘अच्छे दिनों’ की दुहाई देकर विकास के दावे करते नहीं थकते मगर, हकीकत देखें तो पिछले छह महीने से उनकी अपनी निधि ही डंप है जबकि योगी सरकार ने जुलाई में ही प्रत्येक विधायक की निधि में 62.5 लाख की रकम भेज दी थी। विधायकों ने कामों के प्रस्ताव भी दे दिए लेकिन उन पर अमल शुरू नहीं हो पाया है। लगता है कि हर साल की तरह इस साल भी वर्ष के आखिरी तीन महीनों में विधायक निधि का बजट निजी या पुराने कामों पर लुटाया जाएगा।
योगी सरकार ने वित्तीय वर्ष 2016-17 में शहर, कैंट, बिथरी, फरीदपुर, भोजीपुरा, आंवला, बहेड़ी, नवाबगंज और मीरगंज विधायक तथा एक एमएलसी की निधि में 62.5 लाख के हिसाब से कुल 6.25 करोड़ की रकम डीआरडीए को जुलाई में ही जारी कर दी थी। इसी के साथ ही सरकार ने डीआरडीए को नई गाइड लाइन भी जारी की थी, जिसमें विधायक निधि के समस्त काम किसी प्राइवेट एनजीओ से न कराकर सरकारी संस्था से कराने के निर्देश दिए गए थे। ज्यादातर विधायकों ने अपनी निधि में सड़क, नाली, बारातघर, शवदाह गृह निर्माण के अलावा सोलर लाइट, बिजली ट्रांसफार्मर लगाने और केबल बिछाने संबंधी कामों के प्रस्ताव डीआरडीए को अक्तूबर तक भेज दिए थे, लेकिन अब तक किसी भी विधायक की निधि से कोई काम नहीं हो पाया है और न ही किसी विधायक ने अपनी निधि के कामों की प्रगति पूछने की जरूरत महसूस की है।
जीएसटी बताई जा रही वजह
केंद्र सरकार ने जुलाई में जीएसटी (गुड्स एंड सर्विस टैक्स) लागू कर दी। इसमें निर्माण कार्यों की लागत बढ़ गई। डीआरडीए को अब तक पीडब्ल्यूडी से जीएसटी लागू होने के बाद नई रेट लिस्ट नहीं मिली। इसी वजह से किसी भी विधायक के प्रस्ताव पर एक भी काम शुरू नहीं हो पाया। वित्तीय वर्ष समाप्त होने में मात्र तीन महीने बचे हैं। पीडब्ल्यूडी की रेट लिस्ट मिल भी गई तो भी सर्दी बढ़ने पर जनवरी तक काम शुरू नहीं हो पाएंगे क्योंकि ज्यादा सर्दी में कोलतार पिघलने में कठिनाई आती है। ऐसे में हर साल की तरह डीआरडीए और आरईएस स्टाफ मिलकर 31 मार्च से पहले बजट खर्च करने की जल्दी में विधायक निधि के काम आनन-फानन में कराने की कोशिश में यह पैसा निजी या पुराने पर खर्च दिखाने में करेगा क्योंकि पहले भी यही होता रहा है।
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अभी तक पीडब्ल्यूडी की रेट लिस्ट नहीं आई है, इसलिए विधायक निधि के काम शुरू नहीं हो पाए हैं। अन्य मंडलों में तो रेट लिस्ट आ गई लेकिन बरेली में क्यों नहीं आई? इसके बारे में भी कुछ पता नहीं है। रेट लिस्ट मिलते ही काम शुरू कराए जाएंगे। वैसे भी विधायक निधि के काम एक महीने में ही हो जाते हैं। इनमें ज्यादा वक्त नहीं लगता है। - वीरेंद्र कुमार यादव, परियोजना निदेशक डीआरडीए