बरेली। दिवाली का पर्व नजदीक आते ही शहर में रौनक बढ़ जाती है। घरों की सजावट में दीये और मोमबत्तियों की रोशनी छा जाती है। इस महापर्व पर स्वयं सहायता समूह की महिलाएं भी मोमबत्तियां, रंग-बिरंगे दीये और सजावट से जुड़ी अन्य सामग्री बनाने में जुट गई है। उनकी ओर से बनाई हुई सामग्री, पारंपरिक कला के साथ-साथ आधुनिकता का बेहतरीन मिश्रण होती हैं। स्वयं सहायता समूह की सदस्य मिट्टी के दीयों का निर्माण करती हैं और जैविक सामग्री से मोमबत्तियों को भी तैयार करती हैं।
जय मां संतोषी स्वयं सहायता समूह की संचालिका रेखा बताती हैं कि उनके समूह में 10 महिलाएं हैं जो वर्ष 2015 से आचार, जैम, मुरब्बे और मोमबत्ती बनाने का कार्य करती आई हैं। दिवाली के मौके पर वह पर्यावरण अनुकूल दीये, मोमबत्तियां और सजावट की सामग्री तैयार करती हैं। इस बार उन्हें 500 दीपों के साथ-साथ एक क्विंटल मोमबत्तियों का भी ऑर्डर मिला है जो पहले से ज्यादा है।
नारी शक्ति समूह की अध्यक्ष जगरानी ने बताया कि समूह की शुरूआत 2018 में की गई थी, तब से लेकर वर्तमान तक समूह से 12 महिलाएं जुड़ चुकी हैं, जो झंडे, मोमबत्ती और चप्पल बनाने का काम करती हैं। उनके मुताबिक मोमबत्तियों के निर्माण का कार्य एक महीना पूर्व आरंभ कर दिया जाता है। मोमबत्ती पूरी तरह से जैविक सामग्री से बनाई जाती हैं, जो पर्यावरण को नुकसान नहीं पहुंचाती हैं।