बरेली। जीआईएस सर्वे के आधार पर लक्ष्य के सापेक्ष गृह कर वसूलना निगम के गले का फांस बनता जा रहा है। यह सत्र समापन की ओर है और निगम के पास गड़बड़ बिल सुधारने के लिए ढेरों मामले लंबित हैं। बिना सुधारे, बिल की वसूली नहीं हो पाएगी। दूसरी ओर हाल ही में राजस्व निरीक्षकों के कार्यक्षेत्र में फेरबदल कर दिया गया। इससे भी राजस्व वसूली में प्रभाव पड़ रहा है।
जीआईएस सर्वे के बाद गृह कर के बिल में ढेरों गड़बड़ियां सामने आई हैं। इसमें सबसे अधिक डबल डिमांड और प्रापर्टी मैच की शिकायतें हैं। उसके बावजूद निगम ने अपनी ओर से डिमांड सर्वे शासन को भेजा दिया। उसे देखते हुए शासन से 110 करोड़ का लक्ष्य दे दिया गया। 31 मार्च को वित्तीय वर्ष के अंत तक लक्ष्य पूरा नहीं होता दिख रहा है। अफसरों ने बताया कि अभी तक स्वकर के फार्मों तक का निस्तारण नहीं हो सका है। 15 फरवरी से स्वकर फार्म लेना बंद कर दिया गया है।
इन इलाकों में अभी तक बंट रहे नोटिस
मुख्य कर निर्धारण अधिकारी ने राजस्व वसूली के बीच में ही राजस्व निरीक्षकों के कार्यक्षेत्र में फेरबदल किया था। 30 जनवरी को जारी हुए आदेश में राजस्व निरीक्षक नीरज गंगवार को जोन-एक से हटाकर राजस्व व अतिक्रमण, खुशबू भारद्वाज को जोन-दो से जोन तीन, टिंकू सिंह को राजस्व विभाग से जोन-चार, कुमारी आंचल चक्रवर्ती को जोन एक और कर समाहर्ता विशाल जौहरी को जोन-दो की जिम्मेदारी दी थी। बनखंडीनाथ मंदिर, चक महमूद, जखीरा, कठघर, बाकरगंज, सूफी टोला, रोहली टोला, हजियापुर, मीरा की पेठ समेत डीडी पुरम के कई इलाकों की प्रापर्टी मैच की समस्या अभी तक बनी हुई है। इन्हीं इलाकों में अब नोटिस बांटने की कवायद तक चल रही है, जो पूरी नहीं हो सकी है।
- स्वकर फार्म भरने को लेकर संशय की स्थिति
पार्षद राजेश अग्रवाल, छंगामल मौर्य, अलीम खां सुल्तानी, सलीम पटवारी, संतोष कश्यप का कहना है कि स्वकर को लेकर कर विभाग ने शुरू से ही उदासीनता दिखाई है। स्वकर के फार्म को बीच में बंद करना भी राजस्व में कम वसूली होने का कारण बनी हुई है। अभी निगम ने 50 करोड़ से अधिक की कर वसूली की है, वह भी स्वकर की बदौलत ही हो सकी है। स्वकर फार्म 15 फरवरी से बंद कर दिए हैं। पार्षदों ने नगर आयुक्त से मुलाकात भी की थी, लेकिन अभी तक दोबारा स्वकर फार्म लेने के आदेश नहीं दिए गए हैं। संवाद
नगर निगम की कई टीमेंं लगी हुई हैं। इनको लेकर कोई भी समस्या नहीं है। लक्ष्य की प्राप्ति के लिए टीमें कैंप लगा रही हैं और अच्छी रिकवरी हो रही है। जिन इलाकों से बीते साल सात घरों से शुल्क आया था, वहां से 200 से अधिक लोगों ने कर जमा कर दिया है। - प्रदीप कुमार, मुख्य कर निर्धारण अधिकारी