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होम आइसोलेशनः अगर जरा सी भी चूक हुई तो दमघोट सकता है हैप्पी हाइपोक्सिया

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होम आइसोलेशन का फैसला राहत भरा मगर लापरवाही से जान का जोखिम भी
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संक्रमितों की निगरानी के लिए आरबीएसके की टीम गठित, रोज होगी मॉनिटरिंग

बरेली। कोरोना संक्रमितों को अस्पताल में रहने के बजाय घर पर ही आइसोलेशन की सुविधा देने के प्रस्ताव को मंजूरी मिल गई है, लेकिन इसमें खतरे भी बेशुमार हैं। संक्रमितों को पूरी जिम्मेदारी के साथ नई व्यवस्था में रहना सीखना होगा। इसमें अगर जरा सी भी चूक हुई तो स्थितियां भयावह हो सकती हैं। यह कहना है कोरोना वायरस की गतिविधियों पर निगाह रख रहे विशेषज्ञों का। उनके मुताबिक, हल्के लक्षण वाले संक्रमितों को हर दिन अपने खून में ऑक्सीजन की मात्रा नापनी होगी। इसमें अगर चूक हुई तो वह हैप्पी हाइपोक्सिया के शिकार हो सकते हैं। यह उनका दम घोट सकती है।
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आईएमए के उपाध्यक्ष डॉ. विनोद पागरानी बताते हैं कि कोरोना वायरस को लेकर हाल ही में किए गए एक शोध में पता चला है कि कोरोना शरीर में हैप्पी हाइपोक्सिया की समस्या को बढ़ा रहा है। इसकी वजह से संक्रमित मरीजों की मौत का आंकड़ा बढ़ रहा है। अध्ययन के मुताबिक, इससे पीड़ित मरीजों को कोरोना के लक्षण कम महसूस होते हैं। दूसरी ओर, शरीर में ऑक्सीजन की कमी महसूस होने लगती है। इसे साइलेंट हाइपोक्सिमिया भी कहा जाता है। इससे पीड़ित संक्रमित के रक्त में ऑक्सीजन की दर घटने लगती है। इसकी वजह से कार्बन डाईऑक्साइड की अधिकता से फेफड़ों में दाग बनने लगते हैं। ऑक्सीजन की कम होती दर की वजह से हल्की सुस्ती रहती है, मगर इससे सेहत पर ज्यादा असर नहीं दिखता है। वहीं, रक्त में ऑक्सीजन का स्तर 80 फीसदी से जब नीचे चला जाता है तो खड़े-खड़े ही जान जा सकती है।

ऑक्सीजन का स्तर कम होने पर बताएं

वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. सुदीप सरन के मुताबिक हैप्पी हाइपोक्सिया का पता लगाने के लिए पल्स ऑक्सीमीटर से ऑक्सीजन का स्तर मापते रहने की बेहद जरूरत है। इस उपकरण से शरीर में आक्सीजन की दर का पता चलता रहता है। अगर ऑक्सीजन का स्तर कम होता दिख रहा है तो संक्रमित इसे छिपाएं नहीं बल्कि मॉनिटरिंग करने वालों को बताएं। स्वास्थ्य विभाग को सूचना दें, ताकि समय रहते इसका उपचार शुरू हो सके।

कैसे जानलेवा होता है हाइपोक्सिया

डॉक्टरों के अनुसार, संक्रमित रोगियों में ऑक्सीजन का स्तर कम हो जाता है, ऐसी स्थिति में मस्तिष्क तब तक प्रतिक्रिया नहीं देता है, जब तक ऑक्सीजन का स्तर बहुत ज्यादा कम न हो जाए। कई रोगियों में कार्बन डाईऑक्साइड का स्तर बढ़ने से ऑक्सीजन का स्तर कम हो जाता है। इससे सूंघने की क्षमता में कमी महसूस होने लगती है। बेचैनी बढ़ती है और मस्तिष्क काम करना बंद करने लगता है, यह स्थिति घातक होती है।

घर में रखने होंगे कुछ उपकरण

डॉ. पागरानी कहते हैं कि घर पर रहने के दौरान कोई खास खर्च नहीं होगा। पल्स ऑक्सीमीटर और थर्मल या इलेक्ट्रॉनिक थर्मामीटर खरीदना होगा। बमुश्किल दो से तीन हजार रुपये में ये उपकरण आ जाएंगे। इसके अलावा मास्क, वॉटर हीटर, ग्लब्स आदि पर भी कुछ खर्च करना होगा। अधिकतम पांच हजार रुपये में संक्रमित दस दिनों में स्वस्थ हो जाएंगे। हालांकि, इस बीच उन्हें सतर्क रहने की जरूरत है, ताकि संक्रमण का फैलाव न हो सके।

संक्रमितों की निगरानी के लिए टीम गठित

होम आइसोलेशन की सुविधा शुरू हो गई है। इसके लिए संक्रमितों को शपथ पत्र देना होगा। उनकी निगरानी के लिए आरबीएसके की टीम बनाई गई है। इस टीम के पास होम आइसोलेशन वाले संक्रमितों की डिटेल होगी। टीम अचानक चेकिंग करने उस इलाके में जाएगी और अगर मरीज या उसके घरवालों ने निर्देशों के पालन में लापरवाही बरती तो न केवल होम आइसोलेशन की सुविधा खत्म होगी, बल्कि एफआईआर भी दर्ज कराई जा सकती है। टीम में डॉ. विक्रांत, डॉ. रविंद्र, डॉ. आकांक्षा, डॉ. अरुण आदि शामिल हैं।

होम आइसोलेशन की ये हैं शर्तें

संक्रमित एसिम्प्टोमैटिक हो। घर में उसके आइसोलेशन, परिजनों के क्वारंटीन की सुविधा होनी चाहिए। संक्रमित मरीज के पास एक किट होनी चाहिए, जिसमें पल्स ऑक्सीमीटर, थर्मामीटर, मास्क, ग्लब्स, सोडियम हाइपोक्लोराइट सॉल्यूशन होना चाहिए। मरीज की देखभाल के लिए घर में कोई एक व्यक्ति होना चाहिए। वह मरीज के संपर्क में आने पर सभी निर्देशों का पालन करेगा। मोबाइल में आरोग्य सेतु एप्लीकेशन डाउनलोड करना होगा और प्रतिदिन दो बार अपने बारे में सभी सूचना अपडेट करनी होंगी।

होम आइसोलेशन के लिए आवेदन कम

माना जा रहा था कि होम आइसोलेशन की सुविधा शुरू होने के बाद ज्यादातर संक्रमित इसे अपनाएंगे। मगर बीते दो दिनों में जो स्थिति सामने आई है, उसके मुताबिक होम आइसोलेशन के लिए ज्यादातर संक्रमित राजी नहीं है। इसकी मुख्य वजह होम आइसोलेशन के लिए रखी गईं शर्तें हैं। इनमें किट खरीदना, एक अलग कमरा अटैच बाथरूम के साथ होना, प्रॉपर मॉनिटरिंग के साथ ही कहीं चूक होने पर स्थितियां गंभीर होने का खौफ भी है। अब तक छह-सात संक्रमितों के परिजन ही होम आइसोलेशन के लिए कार्यालय पहुंचे हैं।

मरीज को देना होगा शपथ पत्र

एसीएमओ डॉ. आरएन गिरि के मुताबिक, होम आइसोलेशन के लिए मरीज को एक शपथ पत्र देना होगा। यह प्रोफार्मा सीएमओ कार्यालय और सरकारी अस्पताल, स्वास्थ्य केंद्र पर उपलब्ध है। इसे भरकर जमा करना होगा। संक्रमित के घर पर होम आइसोलेशन का स्टिकर चस्पा किया जाएगा। जो शर्तों का अनुपालन कर सकते हैं, उन्हें ही यह सुविधा दी जाएगी।
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