Holly in phagun Trse, lashed in Sawan embers ...
- फोटो : बरेली, अमर उजाला
छप्पन भोग कार्यक्रम में होली से पहले फाग की भक्तिमय फुहार से श्रद्धालु ओतप्रोत हो गए। भगवान गिरिराज के भजनाें की ऐसी बयार बही कि भक्त झूमने लगे। फूलों की होली खेली गई। वहीं, कान्हा के वियोग भरे गीत सुनकर भक्त भावविभोर हो उठे। देर रात तक चले छप्पन भोग कार्यक्रम की छटा बिखरी रही। लाइन से दर्शन करने वाले भक्त जुटे रहे। भक्तों ने दुग्धाभिषेक किया।
त्रिवटीनाथ मंदिर स्थित कथा स्थल परिसर में आयोजित छप्पन भोग एवं फाग महोत्सव मनाया गया। शुक्रवार सुबह भगवान गिरिराज की विधि विधान से पूजा की गई और भोग लगाया। इसके बाद भव्य दरबार सजा। इस मौके पर गाय गोबर से बनी गिरिराज की प्रतिमा देखते बन रही थी। इसे सुंदर फूलों से सजाया गया था। गिरिराज का दुग्ध अभिषेक करने वाले श्रद्धालुओं की लाइन देर रात तक लगी रही। विशेष तरह से तैयार प्रसाद भक्तों को बांटा गया। अभिषेक कार्यक्रम के साथ ही भजन संध्या चलती रही। श्रीधाम वृंदावन बरसाना से आईं पूर्णिमा दीदी ने संगीतमय माहौल में भक्ताें को झूमने पर मजबूर कर दिया। उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण से जुड़े हर पहलू को गीताें के माध्यम से प्रस्तुत किया। कान्हा के वियोग में जब उन्होंने ‘फागुन में होली को तरसे, सावन में बरसे अंगारे...’ गाया तो लोगों के चेहरे पर एक तड़प दिखी। जब उनके चरित्र का वर्णन गीताें से हो रहा था तो महिलाओं के साथ पुरुष भी अपने पैर थिरकने से नहीं रोक पा रहे थे। उन्होंने ‘एक बार आ जाओ रंगीले रसिया...’ गाकर भक्ताें को गदगद कर दिया। सुबह पूजन में मुकेश खंडेलवाल, राजीव बूबना, राजू खंडेलवाल, मनीष अग्रवाल, रजत शर्मा, पंकज अग्रवाल, राजीव खंडेलवाल, रवि अग्रवाल, मुकेश गुप्ता, देवेंद्र खंडेलवाल, दिनेश चंद्र खंडेलवाल व अन्य का सहयोग रहा।