खुर्रमनगर गौंटिया तिराहा पर कब्रिस्तान के बराबर में रोड के किनारे पीडब्ल्यूडी की जमीन पर पंचपीर बाबा की जियारत बनी है। इसमें पांच कब्रें हैं। ये पंचपीर बाबा कौन थे। कब और कहां पैदा हुए। बरेली में कैसे आ गए। ये जियारत की देखभाल करने वाले फहीम को भी नहीं पता। फहीम सिर्फ इतना जानते हैं कि पंचपीर बाबा की सेवा अब्बू फरीब भी करते थे। तीन साल पहले वह गुजर गए तो अब सेवा उनको करनी है।
भूसे का कारोबार करने वाले फहीम ने पंचपीर बाबा के चारों ओर बाउंड्रीवाल करा दी है। लोग यहां रोजाना अगरबत्ती और प्रसाद चढ़ाते हैं। बृहस्पतिवार को इज्जतनगर के मौलाना कामिल जियारत पर आकर लोगों के लिए दुआएं मांगते हैं। जियारत की जमीन के बगल से हाइवे की सड़क है जो अब पीडब्ल्यूडी को हैंडओवर हो चुकी है। सेना ने बगल में डिफेंस लैंड का बोर्ड लगा रखा है। यहां सरकारी जमीन पर धीरे-धीरे मस्जिद बनाने की तैयारी चल रही है।
जियारत की देखादेखी थोड़ी दूर आगे चलकर सड़क के किनारे ही अंगन बाबा का दरबार बन चुका है। यहां बाउंड्रीवाल कराकर दो छोटे-छोटे मंदिर बना दिए गए हैं। मंदिर के सामने रहने वाले ब्रजेश सोनकर बताते हैं कि अंगनबाबा दरबार में हर सावन को पूजा अर्चना और भंडारा होने लगा है। होली को पूजा होती है। अंगनबाबा दरबार से सौ कदम की दूरी पर काली मां का मंदिर बन गया है। ये सड़क से सटकर बना है। सरकारी हैंडपंप भी लग चुका है। पांच साल के अंदर सेना और पीडब्ल्यूडी की जमीन पर तीन नए धार्मिक स्थल बनने से सड़क संकरी होती जा रही है। मंदिर की देख रेख करने वाले मानते हैं कि अतिक्रमण है लेकिन वही पुराना जवाब कि उनका हट जाएगा तो ये भी हटा लेंगे। धार्मिक कंपटीशन की वजह से पंचपीर बाबा और मंदिरों का आकार बढ़ता जा रहा है। इससे भविष्य में सड़क का चौड़ीकरण होना भी मुश्किल होगा। पीडब्ल्यूडी से किसी को नोटिस तक नहीं भेजा गया है।
‘पीडब्ल्यूडी की जमीन पर नए धार्मिक स्थल बन रहे हैं जो कि गलत है। इन स्थलों को रोकने के लिए पुलिस और प्रशासन को पत्र लिखेंगे। दोनों में समन्वय बनाकर ही धार्मिक स्थलों का अतिक्रमण हटाया जा सकता है।’
केके पाहुंजा, एक्सईएन पीडब्ल्यूडी