प्रशासन के अफसरों ने भी नहीं दिखाई गंभीरता, उल्टे होली से पहले छुट्टी चले गए एफएसडीए के अफसर
बरेली। नामचीन कंपनियों से रिजेक्ट की जाने वाली एक्सपायर नमकीन पशु आहार के नाम पर नीलामी में खरीदकर उसे नई पैकिंग में बेचे जाने की अमर उजाला की खबर का हाईकोर्ट ने भले ही स्वत: संज्ञान ले लिया लेकिन इसे रोकने के साथ मुनाफाखोरों पर कार्रवाई करने की जिस एफएसडीए विभाग की पहली जिम्मेदारी है, वह टस से मस तक नहीं हुआ। जिला प्रशासन और मंडल मुख्यालय पर बैठे उच्चाधिकारियों ने भी आम लोगों की सेहत से जुड़े इस गंभीर मामले का संज्ञान लेने की जहमत नहीं उठाई। हद यह है कि होली से पहले जब एफएसडीए को सबसे ज्यादा सक्रिय होना चाहिए था, उसके कई अफसर छुट्टी चले गए हैं।
होली से पहले शहर का बाजार हमेशा की तरह खाने-पीने की मिलावटी चीजों से भरा हुआ है। मिलावटखोरी के साथ मुनाफाखोरों ने इस बार कमाई के लिए कई नए फंडे ईजाद किए हैं जिनमें बड़ी कंपनियों की रिजेक्टेड नमकीन जिसे उनकी ओर से एक्सपायर बताकर नीलाम किया जाता है, उसे पशु आहार के नाम पर खरीदकर मार्केट में मिक्सचर और नवरत्न के लोकल ब्रांड के तौर पर उतारा गया है। पूरा रिटेल बाजार इस घटिया नमकीन से भरा पड़ा है। अमर उजाला ने सरकारी सिस्टम का ध्यान इस ओर खींचने के लिए 21 फरवरी को इस गोरखधंधे का खुलासा किया था, इसके बाद लगातार खबरें छपती रहीं लेकिन आम लोगों की सेहत से जुड़ा गंभीर मसला होने के बावजूद न एफएसडीए ने इसकी जांच कराने की पहल की न प्रशासन के अफसरों ने इसका संज्ञान लिया।
अब इस मामले में हाईकोर्ट के स्वत: संज्ञान लिए जाने के साथ एफएसडीए और शासन के अफसरों को शुक्रवार को तलब किए जाने के बाद जरूर सरकारी सिस्टम में बेचैनी का माहौल पैदा हो गया। बता दें कि अपने उत्पादों की गुणवत्ता के प्रति काफी काफी संवेदनशील रहने वाली नामीगिरामी कंपनियां हाईटेक मशीनों से उनका परीक्षण कराती हैं। गुणवत्ता में जरा सी खामी मिलने पर पूरी लॉट रिजेक्ट कर उसे पशु आहार घोषित कर दिया जाता है और इसे नीलामी के लिए भेज दिया जाता है। मुनाफाखोर इस रिजेक्टेड नमकीन को खरीदकर उसे नए सिरे से तैयार करते हैं और फिर उसे लोकल ब्रांड और लूज नमकीन के तौर पर मार्केट में उतार देते हैं। सस्ता होने की वजह से आम लोगों में इस घटिया नमकीन की बड़े पैमाने पर खपत है। मुनाफाखोरों को इस मिलावटी नमकीन पर कंपनियों की नमकीन बेचने के मुकाबले कई गुना ज्यादा मुनाफा होता है।
दिवाली से पहले एफएसडीए ने पकड़ा था खेल मगर निपटा दिया
दिवाली से पहले पशु आहार के नाम पर खरीदी गई रिजेक्टेड नमकीन को बाजार में बेचने का मामला खुद प्रशासन के अफसरों ने पकड़ा था लेकिन फिर भी उसका लैब में परीक्षण नहीं कराया गया लिहाजा कोई कार्रवाई भी नहीं हो पाई। बताया जाता है कि यह रिजेक्ट नमकीन दिल्ली से बरेली लाई जा रही थी। पूछताछ में मिलावट करने वाले कारखाने और कारोबारी का नाम भी सामने आया था। इसके बावजूद एफएसडीए सक्रिय नहीं हुआ। ब्रह्मपुरा में इस कारखाने पर छापा मारकर करीब ढाई क्विंटल घटिया नमकीन नष्ट कराने का दावा जरूर किया गया लेकिन मिलावटखोर से सांठगांठ कर पूरा मामला रफादफा कर दिया गया।