बरेली। हाइपरटेंशन (उच्च रक्तचाप) सायलेंट किलर है। एक दशक में ओपीडी में पहुंचने वाले हाइपरटेंशन के मरीजों की संख्या में 30 फीसदी इजाफा हुआ है। चिकित्सकों के मुताबिक समय पर इलाज न हो तो हृदय, किडनी, मस्तिष्क पर भी इसके दुष्प्रभाव हो सकते हैं।
जिला अस्पताल के वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. राहुल बाजपेई के मुताबिक हाइपरटेंशन की बड़ी वजह अव्यवस्थित जीवनशैली और मानसिक तनाव है। हृदय रोग और असमय मौत की प्रमुख वजहों में से हाइपरटेंशन एक है। इसके क्रोनिक स्थिति में पहुंचने पर धमनियों में खून का दबाव बढ़ता है। इससे शरीर के सभी अंग प्रभावित होते हैं। शुरुआत में इसकी पहचान कठिन होती है। मरीज शारीरिक दुष्प्रभाव को नजरंदाज करते रहते हैं। समस्या बढ़ने पर जब चिकित्सक के पास पहुंचते हैं तो बीमारी का पता चलता है। इसे समय पर नियंत्रित न किया जाए तो व्यक्ति के हृदयाघात, ब्रेन स्ट्रोक, दिल का बढ़ना, सांस फूलने, गुर्दे की खराबी, पैरालिसिस समेत अन्य गंभीर रोगों की चपेट में आने की आशंका रहती है।
वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. आरके गुप्ता के मुताबिक ओपीडी में इलाज के लिए पहुंच रहे संदिग्ध मरीजों की जांच में 30 फीसदी उच्च रक्तचाप की चपेट में मिल रहे हैं। उन्हें दवा के साथ रक्तचाप सामान्य रखने के लिए जरूरी सुझाव भी दिए जाते हैं।
70 फीसदी लोग अनजान, दस फीसदी नहीं ले रहे दवाएं
वरिष्ठ फिजीशियन डाॅ. सुदीप सरन के मुताबिक 70 फीसदी लोगों को पता ही नहीं होता कि वे हाइपरटेंशन की चपेट में हैं। जिन 30 फीसदी लोगों को पता भी होता है, उसमें से 20 फीसदी इसे नियंत्रित करने के प्रति बेपरवाह होते हैं। सिर्फ 10 फीसदी लोग ही नियमित रूप से दवा का सेवन करते हैं। डाॅ. सरन के मुताबिक हृदयाघात से होने वाली 45 फीसदी मौतों का कारण उच्च रक्तचाप होता है। इसलिए सावधानी बरतें।
जरूरी सावधानियां- घी, मक्खन, मलाई, चावल, मैदा, नमक, चीनी व अन्य सफेद पदार्थों को खाने से बचें।
- खनिज व विटामिन के लिए ताजी सब्जियों का सेवन करें। कॉफी-चाय से बचें।
- फलों के जूस के बजाय साबुत फल, ड्राई फ्रूट खाएं। भोजन में नमक कम करें।