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Bareilly News: बदहाल इमारतों में सिमटी विरासत, 10 साल से आईटीआई प्रशिक्षुओं को नहीं मिले नए उपकरण

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इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग की कार्यशाला में रखें उपकरणों पर जमी धूल, शिक्षक दे रहे सफाई
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बरेली। सिविल लाइंस स्थित राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई) अपनी जर्जर इमारत में गौरवशाली विरासत समेटे हुए है। कभी शहर के युवाओं को हुनरमंद बनाने में अहम भूमिका निभाने वाला यह केंद्र अब उपेक्षा का शिकार है। सोमवार को की गई पड़ताल में सामने आया कि 10 साल से नए उपकरण नहीं आने के कारण यहां विद्यार्थियों का प्रशिक्षण महज औपचारिकता बन कर रह गया है।

सिविल लाइंस स्थित संस्थान में एक साथ महिला आईटीआई, काष्ठ कला, बहेड़ी आईटीआई और सीबीगंज काष्ठ कला संस्थान के विद्यार्थी अलग-अलग प्रशिक्षण लेते हैं। उनको आधुनिक औद्योगिक जरूरतों के मुताबिक प्रशिक्षण नहीं मिल पा रहा है। संस्थान में पहले से मौजूद उपकरण धूल फांक रहे हैं।
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विद्यार्थियों ने बताया कि टाटा की ओर से तैयार की गई प्रयोगशाला में ही उनको व्यावहारिक ज्ञान मिल पा रहा है। चारों आईटीआई के विद्यार्थियों के लिए कोई भी प्रयोगशाला सही ढंग से संचालित नहीं की जा रही है। महिला आईटीआई की इलेक्ट्रॉनिक्स प्रयोगशाला में उपकरण धूल फांक रहे हैं। शिक्षकों ने पल्ला झाड़ते हुए कहा कि ये पहले बंद हो चुके ट्रेड के उपकरण हैं। व्यावहारिक प्रशिक्षण के अभाव में वह औद्योगिक क्षेत्र की मांगों को पूरी करने में अक्षम साबित होंगे।
संस्थान में बुनियादी सुविधाएं भी नहीं हैं। महिला शौचालय पर ताला लगा है, जबकि पुरुष शौचालय की हालत बेहद खराब है। कारपेंटर और मैकेनिकल ट्रेड की कार्यशालाएं वर्ष 1911 में निर्मित जर्जर इमारतों में संचालित हो रही हैं। विद्यार्थियों के अनुसार, वर्ष 2017 में नाम मात्र की मरम्मत हुई थी। अब इमारतें फिर जर्जर हो चुकी हैं। कहीं टिनशेड टूटा है तो कहीं दरवाजे जर्जर हैं। इस असुरक्षित माहौल में युवाओं को प्रशिक्षण लेना पड़ रहा है।

शिक्षकों का कहना है कि रात के समय परिसर की सुरक्षा करना बेहद मुश्किल होता है, क्योंकि अंदर से ही वन विभाग के लिए भी रास्ता जाता है। प्रबंधन की ओर से कई पुरानी इमारतों की जगह छात्रावास और कर्मचारियों के लिए कमरे बनाने की कवायद की जा रही है। शिक्षकों का मानना है कि कर्मचारियों के आवास बनने के बाद ही कैंपस की सुरक्षा सुनिश्चित हो पाएगी। अंदर जाने वाली सड़क का प्रस्ताव पारित हो गया है, पर निर्माण अभी बाकी है। संवाद
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इंडस्ट्री 4.0 के तहत उपकरण मंगाए गए हैं और प्रयोगशाला को आधुनिक बनाने का प्रयास किया जा रहा है। पुराने पाठ्यक्रम के मुताबिक मौजूद उपकरणों को हटाकर नया लाने की प्रक्रिया जारी रही है। - टीकम शरण, प्राचार्य, महिला आईटीआई
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