फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

एक ने रेफर नहीं किया दूसरे ने भर्ती,...और मर गई पूनम

Tue, 20 Jan 2015 01:24 AM IST
बरेली
विज्ञापन
विज्ञापन
मंगलवार को एक महिला सेहत महकमे की लापरवाही की भेंट चढ़ गई। सरकारी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में बच्ची जनने के कुछ समय बाद हालत बिगड़ने पर भी अस्पताल वालों ने उसे रेफर नहीं किया। घर वाले उसे जिला महिला अस्पताल ले गए लेकिन रेफर स्लिप न होने के चलते वहां उसे भर्ती करने से मना कर दिया गया। थक हार कर उसे निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया। संस्थागत प्रसव कराने की हिमायती सरकार और इस पूरे सेहत महकमे की व्यवस्था पर यह मौत सवाल छोड़ गई है। उसके घरवालों ने दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए सीएमओ से शिकायत की है और कार्रवाई न होने पर अंत्येष्टि न करने की चेतावनी दी है।
विज्ञापन

सिस्टम की शिकार हुई यह महिला जैतीपुर शरीफपुर गांव निवासी पप्पू की पत्नी पूनम थी। पप्पू के मुताबिक सोमवार को दिन में 11 बजे पूनम को प्रसव पीड़ा हुई। एंबुलेंस बुलाकर उसे मझगवां पीएचसी ले जाया गया। एंबुलेंस वाले ने दो सौ रुपये मिठाई के नाम पर ले लिए। अस्पताल में बेटी जन्मी तो नर्सों ने मिठाई के नाम पर सौ-सौ रुपये झटक लिए। कुछ समय बाद पूनम को ब्लीडिंग होने लगी। घरवालों ने रेफर करने को कहा तो नर्स ने कंट्रोल करने की बात कहते हुए मना कर दिया। स्थिति ज्यादा खराब होने पर घरवालों ने फिर एंबुलेंस बुलाई। एंबुलेंस नहीं आई तो वे लोग एक गाड़ी करके पूनम को जिला महिला अस्पताल लाए। यहां स्थिति खराब होने और रेफर स्लिप न होने पर नर्सों ने पूनम को भर्ती करने से मना कर दिया। घरवाले तत्काल ही पूनम को एक निजी अस्पताल ले गए जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया। निराश घरवाले शव को गांव ले गए। देर रात तक वे शव को घर में रखे बैठे थे। पूनम के ससुर होरीलाल का कहना था कि मझगवां अस्पताल स्टाफ की लापरवाही से पूनम की मौत हुई है, दोषियों पर कार्रवाई न होने वे शव की अंत्येष्टि नहीं करेंगे। यह बात उनकी ओर से जिला योजना समिति के सदस्य गुलजार हुसैन ने मोबाइल पर सीएमओ को भी बता दी।

तीसरी बच्ची है यह
पूनम की जान तो चली गई पर उसकी नवजात बच्ची को बचाने के लिए परिवार जतन कर रहा है। बच्ची फिलहाल स्वस्थ है। इससे पहले पूनम के एक बेटा और बेटी हैं। दोनों बच्चे छोटे ही हैं। उनको नहीं पता कि उनके सिर से मां का साया उठ चुका है।
विज्ञापन

 
स्वास्थ्य विभाग का पक्ष
पूरे प्रकरण की सच्चाई को जानना जरूरी है। सीएचसी पर सामान्य प्रसव के दौरान जटिलता आई और ब्लीडिंग होने लगी। तब वहां डाक्टर ने प्रसूता को तत्काल जिला अस्पताल के लिए रेफर किया लेकिन परिवार वाले टालमटोल करते रहे। यह वाकया दोपहर करीब एक बजे का है। बाद में चुपचाप निजी वाहन से परिवारवाले प्रसूता लेकर जिला अस्पताल पहुंचे और वहां लेबर रूम में स्टाफ नर्स ने उसे बेड पर लिटाकर डाक्टर को बुलाया। डाक्टर दूसरे मरीज को देख रही थीं और उनके लेबर रूम पहुंचने से पहले ही परिवारवाले लस्त-पस्त हाल में प्रसूता लेकर निकल गए। संबंधित गांव से जिला योजना समिति के सदस्य का फोन आया था और उन्हें घटना संबंधी सच्चाई बता दी।-- डा. विजय यादव, सीएमओ, बरेली।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें