जन स्वास्थ्य के जिम्मेदार सेहत महकमे को इस बार भी भारी भरकम बजट मिला। अफसरों ने तमाम मदों में करोड़ों रुपये खर्च दिखा दिए तो करोड़ों का हिसाब अभी बाकी है। अस्पतालों में निर्माण और मरम्मत का ही काफी धन इसमें शामिल है। मार्च के अंत में पुराने बजट की अवशेष रकम को ठिकाने लगाने और अग्रिम काम दिखाकर और धनराशि मंगाने के रास्ते खोजे जा रहे हैं।
नियमित टीकाकरण में 1.44 लाख में से 1.11 लाभार्थियों को ही लाभ दिया जा सका। इस मद में 1.74 करोड़ रुपये मिले, इसमें से 55.35 लाख अभी तक बचे हैं। पल्स पोलियो प्रतिरक्षण में 2.75 करोड़ रुपये मिले, इसमें 71 लाख रुपया बाकी है। शहर में सौ बेड के मैटरनिटी विंग को प्रस्तावित बीस करोड़ में से चार करोड़ की रकम मिली। अधिकांश रकम अभी खर्च नहीं हो सकी है। जिला अस्पताल परिसर में ही आयुर्वेद चिकित्सा का इंतजाम करने को आयुष विंग बन रही है। इसे मिले 25 लाख में से 19 लाख रुपये खर्च हो चुके हैं। प्रजनन एवं बाल स्वास्थ्य संबंधी कार्यों को 13.64 करोड़ रुपये आए। इसमें 1.47 करोड़ रुपये बचे हैं। मिशन फ्लैक्सीपूल के तहत अस्पतालों के मेंटीनेंस, आशा प्रशिक्षण, रोगी कल्याण समिति आदि के लिए 21.31 करोड़ रुपये फरवरी के अंत तक मिले, इसमें बड़ी धनराशि बकाया है। इस मद का 5.98 करोड़ रुपया जिला स्तर पर तो 8.69 करोड़ रुपया अभी भी पीएचसी स्तर पर पड़ा है। संक्रामक रोगों की रोकथाम संबंधी आईडीएसपी प्रोग्राम के तहत अनुमोदित बजट से 52 हजार रुपये ज्यादा यानी 11.25 लाख रुपया मिला पर इसे खर्च करने में बेहद कंजूसी बरती गई। अभी 8.63 लाख रुपया इस मद में बाकी है। अफसर 31 मार्च से पहले इसका व्यय दिखाने की उधेड़बुन में हैं।