बरेली। त्योहार पर जनशिकायतों के निस्तारण के लिए कंट्रोल रूम स्थापित किया गया, लेकिन निस्तारण के नाम पर टाल-मटोल हुई। कुछ कर्मचारियों की गैर जिम्मेदारी के चलते हेल्प लाइन हेल्पलैस साबित हुई। फोन करने पर कर्मचारी बोले- छुट्टी है। गाय चार घंटे फंसी रही जब नगर निगम की टीम नहीं पहुंची तो लोगों ने मदद के लिए हाथ बढ़ाया। खुद ही मेहनत करके गाय को निकाला। नगर निगम के कंट्रोल रूम में 7055519637 पर आई कुछ शिकायतों की पड़ताल में हकीकत सामने आई है।
कांस्टेबल अमित कुमार ने मंगलवार को कोतवाली के पीछे सरकारी स्कूल के परिसर गाय के फंसे होने की शिकायत सुबह आठ बजे दर्ज कराई। कंट्रोल रूम की कर्मचारी ने उन्हें एक मोबाइल नंबर दिया और कहा कि कॉल करेंगे तो टीम आएगी। कॉल करने पर साढ़े आठ बजे एक कर्मचारी मौके पर पहुंचा। कर्मचारी ने कहा कि वैसे तो छुट्टी है पर प्रयास करके टीम भेजते हैं, लेकिन दो-चार घंटे तक टीम नहीं पहुंची। इस पर अमित ने साथी सिपाहियों की मदद से गाय को सुरक्षित निकाला। नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. भानु प्रकाश का कहना है कि जो शिकायतें आती हैं उनका समाधान किया जाता है। अगर किसी का समाधान नहीं हो सका है तो उसे भी कराएंगे। ब्यूरो
ऐसे हालात सामने आए
सीवर की लीकेज ठीक किए बगैर लौट गई टीम
हजियापुर में सीवर लीकेज की समस्या पर टीम तो पहुंची, लेकिन समाधान नहीं निकला। सात दिनों से सीवर का पानी लीकेज हो रहा है। यहां के निवासी रफीक अहमद ने मंगलवार को दिन में दस बजे कंट्रोल रूम फोन किया। डेढ़ घंटे में टीम पहुंची लेकिन जब कुछ लोगों ने सीवर खोलकर साफ करने में बाधा डाली तो टीम लौट गई। रफीक अहमद का कहना है कि मौके पर सिर्फ मजदूरों की टीम भेजी गई अगर कोई जिम्मेदार अधिकारी आते तो यह हाल न होता है।
बार बार करते शिकायत फिर भी दूर नहीं हुआ अंधेरा
नाथ कॉरिडोर के अंतर्गत सड़क बनाई और लाइटें भी लगाईं, लेकिन पांच लाइटें मढ़ीनाथ से वंशीनगला मार्ग पर महीनों से खराब पड़ी हैं। मढ़ीनाथ निवासी सीएस यादव ने बताया कि नगर निगम के कंट्रोल रूम में चार बार शिकायत कर चुके है, लेकिन एक बार भी लाइटें रोशन नहीं हो सकीं। दिवाली भी अंधेरे में बीत गई।
आशापुरम में जलभराव, नहीं हुआ समाधान
आसापुरम में त्योहार पर भी घर के आगे जल भराव झेलना पड़ा। कंट्रोल रूम में शिकायत के बाद आश्वासन मिला लेकिन मौके पर जल निकासी नहीं कराई गई। मनीष गुप्ता ने बताया कि मौके के हालात देखकर उन्होंने शिकायत दर्ज कराई थी, लेकिन समाधान नहीं हो सका। शिकायतों का अगर ऐसा हश्र होगा तो औचित्य ही क्या बचेगा। यह सवाल उठाते हुए उन्होंने समस्या के समाधान की मांग उठाई।