नो हेलमेट, नो फ्यूल अभियान
सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने के लिए 26 जनवरी से नो हेलमेट, नो फ्यूल अभियान लागू किया गया था, लेकिन इसका सख्ती से पालन नहीं हो रहा है। पांच फरवरी को लखनऊ में सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायमूर्ति अभय मोहन की अध्यक्षता में हुई सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में निर्णय लिया गया है कि सभी सरकारी और अर्ध सरकारी कार्यालयों के बाहर सुरक्षा गार्ड आने-जाने वाले वाहन चालकों की निगरानी करेंगे। हेलमेट के बिना दो पहिया और सीट बेल्ट के बिना आने वाले चार पहिया वाहनों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। दो पहिया वाहनों पर पीछे बैठने वाले दूसरे व्यक्ति के लिए भी हेलमेट अनिवार्य होगा।