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Bareilly News: होली पर पांच सौ लोगों की बिगड़ी तबीयत, अस्पतालों में रातभर पहुंचते रहे मरीज

Tue, 26 Mar 2024 05:56 PM IST
मुकेश कुमार अमर उजाला ब्यूरो, बरेली

सार

होली के त्योहार पर अव्यवस्थित खानपान से कई लोगों की तबीयत बिगड़ गई। सोमवार को शाम से देर रात तक अस्पतालों में मरीज पहुंचते रहे। कई लोगों में फूड प्वॉइजनिंग के लक्षण मिले। इन्हें भर्ती कराना पड़ा। 
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जिला अस्पताल बरेली - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बरेली में होली पर पकवानों के बेहिसाब और अव्यवस्थित खानपान से सोमवार को अस्पतालों में मरीजों की आवाजाही शाम से रातभर लगी रही। स्वास्थ्य विभाग के रिकॉर्ड के मुताबिक करीब पांच सौ से ज्यादा लोगों का हाजमा बिगड़ गया। कई लोगों में फूड प्वॉइजनिंग के लक्षण भी रहे। वहीं, जो लोग इलाज कराने पहुंचे उनमें से 80 फीसदी दवा सेवन के कुछ देर बाद ही राहत मिलने पर घर लौट गए। लेकिन जिनमें फूड प्वॉइजनिंग के लक्षण रहे, उन्हें भर्ती करना पड़ा। 

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हालांकि, स्वस्थ होने के बाद भी यह केस बगैर डॉक्टरी परामर्श के घर चले गए। इन्हें लीव अगेंस्ट मेडिकल एडवाइस में दर्ज किया गया है। जिला अस्पताल के इमरजेंसी मेडिकल ऑफिसर डॉ. केके निर्मल के मुताबिक दोपहर तीन बजे तक करीब 20-25 लोग ही पहुंचे थे। लेकिन सोमवार शाम चार बजे से मंगलवार की भोर तक करीब सौ लोग इलाज के लिए पहुंचे, जिन्हें दवाएं दी गईं।

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उधर, फरीदपुर सीएचसी अधीक्षक डॉ. अनुराग गौतम के मुताबिक एक्सीडेंटल केस कोई नहीं पहुंचा। पर पेट, गैस संबंधी कई करीब तीन दर्जन मरीज इलाज को पहुंचे थे। हालांकि, कोई भर्ती होने को तैयार नहीं था। दवा देने के दो से तीन घंटे बाद वे डिस्चार्ज के लिए कहने लगे।

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तापमान में अचानक बढ़त भी बनी वजह
डॉ. गौतम के मुताबिक सोमवार को दिन के बाद रात में भी लोगों को तपिश का अहसास हुआ। होली पर ज्यादातर तला भुना हुआ भोजन लोगों ने किया। वहीं, कचरी, पापड़ और गुझिया भी खाए। ठंड में शरीर को ऊर्जा की जरूरत होती है। इसलिए ज्यादा भोजन भी पच जाता है। मगर जब तापमान अधिक होता है, तो शरीर को अतिरिक्त ऊर्जा की जरूरत नहीं होता। पाचन क्रिया मंद होने से अपच, गैस की दिक्कत होती है।

ज्यादातर नशे का सेवन करने वाले बीमार
जिला अस्पताल डॉ. निर्मल के मुताबिक जो लोग रात में इलाज को पहुंचे उनमें से ज्यादातर नशे की हालत में भी रहे। उनमें फूड प्वॉइजनिंग के लक्षण मिले। जिसके चलते उल्टी, मतली, बदहवास सी हालत रही। हालांकि, समय से अस्तपाल पहुंचने की वजह से कोई अनहोनी नहीं हुई। बताया कि जो एक्सीडेंटल केस भी पहुंचे। उनमें से भी ज्यादातर नशे का सेवन कर वाहन चलाने के दौरान दुर्घटनाग्रस्त हुए थे।
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