जिला अस्पताल के बच्चा वार्ड में फिर डॉक्टराें की लापरवाही का मामला सामने आया है। एक साल के सूरज को देखने के लिए डॉक्टर देर से पहुंचे, जिससे उसकी मौत हो गई। इससे पहले वहां मौजूद चिकित्सक ने यह कहकर बच्चे को नहीं देखा कि यह उनका केस नहीं है। बुखार से तड़पकर बच्चे की मौत हो गई। अस्पताल प्रशासन ने वार्ड में डॉक्टर के मौजूद होने की बात से इंकार किया है। उनके अनुसार बच्चे को डायरिया नहीं था और वह काफी गंभीर हालत में यहां लाया गया था।
जाटवपुरा का रहने वाला शेखर रिक्शा चालक है। उसके एक साल के बेटे सूरज को 12 दिन पहले हल्का बुखार और दस्त हुए थे। शेखर अपने घर के पास ही क्लीनिक से शेखर का इलाज कराता रहा। जब हालत ज्यादा बिगड़ गई तो उसे नवल नर्सिंग होम में भर्ती कराया। दो दिन तक भर्ती रहने के बाद उसे गुरुवार देर शाम को जिला अस्पताल के बच्चा वार्ड में भर्ती कराया गया। बच्चे को डॉ. करमेंद्र देख रहे थे। शुक्रवार दोपहर को अचानक बच्चे की हालत बिगड़ गई। बुखार तेज था, लिहाजा उसको बेचैनी होने लगी। उसके पिता शेखर ने बताया कि जब बच्चा ज्यादा बीमार हो गया तो वह वार्ड में मौजूद चिकित्सक से देखने की गुहार लगाता रहा। लेकिन चिकित्सक ने यह कहकर मना कर दिया कि यह उनका केस नहीं है, बल्कि जिस डॉक्टर का है उन्हें फ ोन कर बुलाया गया है। चिकित्सक की बात सुनकर शेखर फिर अपने बच्चे के पास चला गया। जब तक डॉक्टर करमेंद्र वार्ड पहुंचे तब तक बच्चे की मौत हो चुकी थी।
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‘बच्चे को नवल नर्सिंग में भर्ती था। वहां से कल गंभीर हालत में यहां लाया गया। एक कर्मचारी के कहने पर उसे भर्ती किया गया, लेकिन उसके परिवार वालाें को पहले ही बता दिया गया था कि बच्चा गंभीर है। वह बेहोश था, तेज बुखार के चलते उसे दौरे और झटके लग रहे थे। बच्चे को डायरिया नहीं था। जब मैं देखने पहुंचा तो उसकी मौत हो चुकी थी।’
डॉ. करमेंद्र, बाल रोग विशेषज्ञ, जिला अस्पताल
- बच्चा वार्ड में हैं ज्यादा डायरिया पीड़ित
जिला अस्पताल के बच्चा वार्ड में डायरिया से पीड़ित बच्चों की संख्या अधिक है। यह दस पहुंच गई है। इसमें दो माह से लेकर नौ माह तक के बच्चे शामिल हैं। वहीं शहर के निजी नर्सिंग होम व अस्पतालों में भी डायरिया के मरीज आ रहे हैं। रामपुर बाग स्थित बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. रवि खन्ना के अस्पताल में डायरिया पीड़ित करीब 12 बच्चे भर्ती हैं। डॉ. प्रेमकुमार के अस्पताल में भी दस बच्चे डायरिया का इलाज करा रहे हैं। डॉ. धर्मेंद्र और डॉ. अशोक मेहंदी रत्ता की ओपीडी में भी डायरिया पीड़ित बच्चों की संख्या बढ़ गई है।
- इन इलाकाें में डायरिया फैलने की आशंका
पिछले दिनों जोगीनवादा के गोसाई गोटियां में आठ लोग डायरिया से पीड़ित पाए गए थे। इनमें सभी एक ही परिवार के लोग थे। इसी तरह बाकरगंज, कसाईटोला, सैलानी, रोहिली टोला, चक, गौटियां, नवादा शेखान, जगतपुर, कांकर टोला, हजियापुर, मलूकपुर, संजयनगर, दुर्गानगर, बिहारीपुर, जखीरा, किला, कटघर, किला छावनी, मिर्ची टोला, शाहबाद, सूफी टोला, रबड़ी टोला, कोट व अन्य गंदे इलाकाें में भी डायरिया फै ल सकता है। इन इलाकाें में नालियां भरी हुई बजबजा रही हैं। जगह- जगह कूड़े के ढेर लगे हैं। सीवर से मलबा निकालकर बाहर फैला दिया गया है, जिसे उठाया नहीं गया है। साथ ही पानी की सप्लाई भी गंदी है। डॉ. वीके धस्माना ने बताया कि डायरिया गंदगी और साफ पानी न मिलने से होता है।
लापरवाही से एक और हो चुकी है मौत
बच्चा वार्ड में पिछले साल एक सुभाषनगर की दो वर्षीय अंजलि भी लापरवाही से अपनी जान गंवा चुकी है। गंभीर निमोनिया से पीड़ित अंजलि को चार घंटे तक कोई डॉक्टर देखने नहीं आया। जिस समय वह आखिरी सांस ले रही थी उस समय वार्ड में सीएमओ और एडी हेल्थ का निरीक्षण चल रहा था। वह स्टाफ को कमियाें के लिए फटकार रहे थे और उधर अंजलि ने दम तोड़ दिया था।