सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों की बदहाल व्यवस्था के क्रम में एक चौंकाने वाला मामला शनिवार को सामने आया। फतेहगंज पूर्वी स्थित एडीशनल प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की पानी की टंकी में बंदर मरे हुए और उनके शव सड़ी हुई हालत में मिले। मामला तब खुला जब पानी काफी बदबूदार हो गया और लोगों ने इसकी शिकायत स्टाफ से की। आनन-फानन में टंकी की सफाई कर स्थानीय स्तर पर केंद्र पर तैनात चिकित्साधिकारियों से लेकर स्टाफ तक ने मामले को दबाने की कोशिश की। देर शाम अमर उजाला से इसकी जानकारी मिलने पर सीएमओ ने पड़ताल शुरू की तो पूरा ब्योरा पुष्ट हुआ। उन्होंने इस प्रकरण को गंभीर लापरवाही मानते हुए चिकित्सा प्रभारी से पूरे मामले पर स्पष्टीकरण तलब किया है।
स्थानीय स्तर पर इस पीएचसी के टैंक में पांच बंदरों के मरे होने की सूचना दी गई और कई दिनों से परिसर में रहने वाले कर्मचारी, मरीज और उनके तीमारदार बदबूदार पानी का इस्तेमाल करते रहे। लोगों ने आशंका दूर करने के लिए पानी टंकी पर जाकर देखा तो ढक्कन ही नहीं थे और बंदरों के शव क्षत - विक्षत हाल पानी में तैर रहे थे। फिर तत्काल चिकित्सा प्रभारी डा. संजीव दिवाकर को मामले की जानकारी दी और तब तक मरे बंदरों को टंकी से निकालकर सफाई कराई गई। सीएमओ डा. विजय यादव ने कहा कि एक दिन पहले गरमी से बेचैन बंदर पानी की टंकी पर चढ़े और उसका ढक्कन तोड़ दिया। दो बंदर उसमें नहाते हुए डूब कर मर गए। इस टंकी के पानी का उपयोग टाययलेट में होता है। बदबू आने पर शनिवार को टंकी साफ करा दी गई है और रविवार को टंकी पर नया ढक्कन लगाया जाएगा। दूसरी ओर स्थानीय भारतीय जनता युवा मोर्चा के वैभव पांडेय, अनिल कश्यप, प्रवीन गुप्ता, अरुण यादव, अजय कुमार, दीपक, अरविंद आदि ने पूरे मामले पर अस्पताल प्रशासन को जिम्मेदार ठहराया और तत्काल व्यवस्था दुरुस्त कराने की मांग की।