स्वाइन फ्लू वायरस एच1 एन1 का जेनेटिक वेरिएशन जारी है। वायरस की उछल कूद अगले साल इस साल से अधिक घातक होगी। इसके लिए फिर से वैक्सीन इजाद होगी और टेमिफ्लू का असर भी बढ़ाना पड़ सकता है। यह कहना है जवाहर लाल नेहरू अलीगढ़ मेडिकल कालेज के डॉ. शोएब जहीर का। डॉ. शोएब एसआरएमएस में आयोजित अंतरराष्ट्रीय कांफ्रेंस मेडिसिन अपडेट में एन1 एच1 पर बोल रहे थे। उन्हाेंने बताया कि हाल ही में अमेरिका की एक रिपोर्ट ने बताया है कि स्वाइन फ्लू के जेनेटिक वेरिएशन यानी वायरस में बदलाव हो गया है। भारत के पुणे स्थित वायरोलॉजी इंस्टीट्यूट में इसको लेकर जांच भी शुरू हो गई है। रिपोर्ट के मुताबिक अगले साल फ्लू के वायरस और ज्यादा ताकतवर होगा।
स्वाइन फ्लू की पांव पसारने के चलते यह विषय कांफ्रेंस में काफी छाया रहा। डॉ. जहीर ने बताया कि भले ही यह वायरस सुअरों से आता हो लेकिन यह इसका मांस खाने से नहीं होेता। सुअर में कई वायरस होते हैं। एच1 एन1 भी इनमें से एक है। यह सुअर के आसपास रहने वाले अगर एक व्यक्ति को हो गया तो उसे मानवाें में फैलता है। 60 फीट की दूरी तक यह वायरस अटैक करता है। उन्हाेंने कहा कि 2009 से 2014 तक वायरस नहीं बदला लेकिन अब बदलने की खबर आ रही है। वायरस हर साल बदलता है। इसलिए वैक्सीन भी छह माह के बाद काम नहीं करती।
डरें जरूर लेकिन पैनिक न बनाएं
स्वाइन फ्लू का मामला बढ़ा तो बाजार में यह बात फैली की यह कुछ दवा कंपनियाें द्वारा अपने स्टॉक को बाहर करने का एक तरीका है। डॉ. शोएब जहीर इसे स्वीकार नहीं करते लेकिन वे इससे इंकार भी नहीं करते। वे कहते हैं कि 2009 में जो वायरस था, वही 2014 में भी है। हो सकता है कि इन सालाें के बीच के स्टॉक को निकालने के लिए यह पैनिक बनाया गया हो लेकिन यह सच है कि लोगाें की जागरूकता के चलते स्वाइन फ्लू के मामले भी उतने ही मिले। अगर अफवाह ही होती तो मामले न मिलतेे। डॉ. जहीर कहते हैं कि स्वाइन फ्लू से डरें जरूर लेकिन पैनिक न बनाएं। उन्हाेंने कहा कि हाथ बार-बार धोएं, सेनीटाइजर रखें, हाथ कम मिलाएं। जुकाम होने पर घर पर ही रहें तो अच्छा होगा।