हाफिजगंज। हादसे में गंभीर रूप से घायल युवक को जिला अस्पताल के डॉक्टरों ने भर्ती नहीं किया, बल्कि खुली चोटों पर मरहम पट्टी करके उसे जबरन घर भेज दिया। युवक सीने में दर्द और सांस लेने में दिक्कत होने की डॉक्टरों से शिकायत करता रहा, लेकिन उसकी एक न सुनी। डॉक्टरों ने उसे पूरी तरह खतरे से बाहर बताकर घर भेज दिया। सुबह उसकी मौत हो गई। युवक के पिता ने जिला अस्पताल के डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगाकर उच्चाधिकारियों से शिकायत की है। हालांकि उन्होंने शव का पोस्टमार्टम कराने से इंकार कर दिया।
हाफिजगंज थाना क्षेत्र के गांव काशी धर्मपुर निवासी योगेंद्र कुमार उर्फ अन्नू अपने मित्र वीरेंद्र कुमार के साथ बाइक से बरेली में बीसलपुर रोड स्थित एक बरातघर में मजदूरी करने गए थे। रात करीब नौ बजे लौटते समय राधामाधव स्कूल के पास एक वाहन ने ओवरटेक करते समय बाइक में साइड मार दी। हादसे में दोनों गंभीर रूप से घायल हो गए। राहगीरों ने दोनों को टेंपो से जिला अस्पताल भिजवाया। वहां इमरजेंसी में मौजूद डॉक्टरों ने योगेंद्र और वीरेंद्र की मरहम पट्टी कर दी। योगेंद्र ने सीने में तेज दर्द और सांस लेने में दिक्कत होने की शिकायत की। इस पर घरवालों ने डॉक्टरों से उसे भर्ती करने को कहा, लेकिन डॉक्टरों ने मामूली चोट बताई। कहा, खतरे की कोई बात नहीं है, घर ले जाओ। परिजन योगेंद्र को घर ले आए। सुबह उसकी मौत हो गई। योगेंद्र के पिता नरेश गंगवार के मुताबिक, उन्होंने जिला अस्पताल में ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर और स्टाफ से योगेंद्र की हालत नाजुक बताकर उसे भर्ती करने की कई गुहार की, लेकिन वह लगातार हालत ठीक होने का दिलासा देकर घर ले जाने का दबाव बनाते रहे। मना करने के बावजूद बिना कोई जांच किए ही जबरन घर भेज दिया। उन्होंने कहा कि जिला अस्पताल के डॉक्टरों की लापरवाही से ही उनके बेटे की जान गई है। उन्होंने सीएमओ और डीएम समेत तमाम उच्चाधिकारियों से इसकी शिकायत की है।
मामला मेरे संज्ञान में नहीं है। परिजन लिखित शिकायत करेंगे तो जांच कराके कार्रवाई की जाएगी। -डॉ. टीएस आर्या, सीएमएस जिला अस्पताल