फरीदपुर। क्लेरा स्वेन मिशन अस्पताल में कैंप लगाकर विदेशी डॉक्टरों से गांव वालों का इलाज कराने का मामला असल में अस्पताल की ब्रांडिंग का फंडा निकला। जांच में पता चला है कि अस्पताल वालों ने जिन विदेशियों को डॉक्टर बताकर गांव वालों का इलाज कराया था, वे डॉक्टर नहीं बल्कि विजिट वीजा पर भारत आए मेडिकल स्टूडेंट थे जिन्हें किसी का इलाज करने का अधिकार ही नहीं था। अस्पताल प्रबंधन की अब इस मामले में बुरी तरह गर्दन फंस गई है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के अधीक्षक की ओर से दिए गए नोटिस पर जवाब देने के लिए अस्पताल प्रबंधन ने नौ दिन का समय मांगा है।
कस्बे के मिशन हॉस्पिटल में दो दिन पहले मेडिकल कैंप लगाया गया था जिसमें कई विदेशियों ने कैंप में आए सैकड़ों लोगों की जांच कर उन्हें दवाएं दी थीं। विदेशी डॉक्टरों के लोगों का इलाज करने की सूचना पर एलआईयू की टीम अस्पताल पहुंची तो एक-एक कर सारे विदेशी कैंप छोड़कर वहां से खिसक गए। इससे शक और गहराया तो एसडीएम विशु राजा ने मिशन हॉस्पिटल को नोटिस जारी कर तीन दिन में यह जवाब देने को कहा कि कैंप में किन लोगों से इलाज कराया गया। मिशन हॉस्पिटल की ओर से अभी तक इस नोटिस का जवाब नहीं दिया गया है। हॉस्पिटल के डायरेक्टर के मुताबिक एसडीएम से दो दिन का समय मांगा गया है। उन्होंने बताया कि कैंप के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और पुलिस से एनओसी ली गई थी। इधर, जांच प्रक्रिया के बीच यह खुलासा भी हुआ है कि कैंप में लोगों का इलाज करने वाले विदेशी असल में डॉक्टर नहीं बल्कि मेडिकल स्टूडेंट थे और विजिट वीजा पर भारत आए थे। फरीदपुर में जब उनके इलाज करने पर विवाद हुआ तो वह यहां से आगरा निकल गए। अस्पताल के डायरेक्टर अब कह रहे हैं कि विदेशी स्टूडेंट्स के आने की पूरी सूचना एलआईयू के पास है।
अस्पताल के प्रचार का फंडा बना गले की फांस
फरीदपुर का मिशन अस्पताल काफी दयनीय हालत में है। अस्पताल को पुनर्जीवित करने के लिए ही 15 अगस्त को हैदराबाद से डॉ. सोलोमन को बुलाया गया था। उनकी ज्वाइनिंग के बाद एक सितंबर को उनकी पत्नी ने भी अस्पताल में नौकरी शुरू की है। इसी बीच अस्पताल प्रबंधन ने पब्लिसिटी के लिए विदेश से आए 16 स्टूडेंट्स को बुलाकर हॉस्पिटल में कैंप लगवा दिया। इन्हें विदेशी डॉक्टर प्रचारित किया गया। यह राज खुलने के बाद अब मिशन हॉस्पिटल प्रशासन सफाई दे रहा है कि कैंप में अस्पताल के ही डॉक्टर इलाज कर रहे थे। विजिट वीजा पर आए स्टूडेंट सिर्फ उनकी मदद कर रहे थे।
विदेशी डॉक्टर लेकिन दवा बरेली की
अस्पताल प्रबंधन की यह भी सफाई है कि कैंप में बांटी गई दवा बरेली से खरीदी गई थी। उसके बिल भी उनके पास मौजूद है। उनका कहना है कि कुछ लोग भ्रामक सूचना फैलाकर अस्पताल को चलने नहीं देना चाहते हैं। इसीलिए विवाद खड़ा किया गया है। उधर, सीएमओ की ओर से जांच अधिकारी डॉ. रंजन गौतम को मंगलवार को जांच करने के लिए फरीदपुर आना था लेकिन वह नहीं पहुंचे।
जांच के बाद निरस्त होगा मिशन अस्पताल का रजिस्ट्रेशन
सीएमओ ने दिया दो दिन में जांच पूरी करने का निर्देश
बरेली। फरीदपुर के मिशन अस्पताल के हेल्थ कैंप में विदेशी डॉक्टरों की दवा से लोगों की हालत बिगड़ने के मामले में फिलहाल सीएमओ ने प्रारंभिक जांच रिपोर्ट के आधार पर अस्पताल प्रशासन को दोषी मानते हुए उसका रजिस्ट्रेशन निलंबित किया है। इसे निरस्त करने की कार्रवाई अस्पताल प्रबंधन के जवाब के आधार पर की जाएगी। स्वास्थ्य विभाग के अफसरों के मुताबिक किसी कैंप में स्वास्थ्य विभाग से रजिस्टर्ड डॉक्टर ही जांच कर सकते हैं। फरीदपुर में जिन विदेशियों ने लोगों की जांच कर दवा दी, वे रजिस्टर्ड नहीं थे। स्वास्थ्य विभाग के अफसरों के मुताबिक प्रारंभिक जांच के बाद अस्पताल का रजिस्ट्रेशन निलंबित किया गया है। सीएमओ ने बताया कि अभी यह भी जांच की जानी है कि विदेशियों ने लोगों को कौन सी दवा किस बीमारी के लिए दी थी। अगर गलत दवा का वितरण पाया गया तो अस्पताल के रजिस्ट्रेशन निरस्त किया जाएगा।
खुफिया विभाग भी कर रही जांच
फरीदपुर के गांव बाकरगंज, चठिया फैजू, जिगनिया समेत कई गांवों में विदेशी डॉक्टरों ने मेडिकल कैंप लगाकर दवा बांटी थी। सूचना मिलने पर खुफिया विभाग की टीम विदेशी डॉक्टरों के पासपोर्ट, वीजा और कैंप की अनुमति की जांच करने पहुंची थी। खुफिया टीम को तो विदेशी टीम मौके पर नहीं मिली लेकिन उसके इलाज करने की पुष्टि हो गई। इसके बाद सीएमओ के साथ खुफिया विभाग भी मामले की जांच करने में जुटा हुआ है।