फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

स्वास्थ्य सुविधाएं तो बढ़ीं पर चिकित्सकों की कमी पड़ रही भारी

विज्ञापन
बरेली का कोविड चिकित्सालय।
विज्ञापन
तीन सौ बेड कोविड अस्पताल में अब तक तैनात नहीं हो सके डॉक्टर
विज्ञापन

54 हेल्थ सेंटर का निर्माण कार्य प्रस्तावित, सीएचसी पर नहीं हैं बालरोग विशेषज्ञ
बरेली। एक दशक पहले तक गंभीर रोगों के इलाज के लिए दिल्ली, लखनऊ के चक्कर काटने पड़ते थे, लेकिन अब आधुनिक सुविधाओं से लैस निजी अस्पतालों की वजह से शहर मेडिकल हब में तब्दील हो चुका है। इसी लिहाज से स्वास्थ्य विभाग में भी इलाज की व्यवस्थाएं बढ़ी हैं पर चिकित्सकों और विशेषज्ञों के अभाव में कमजोर वर्ग बेहतर इलाज के लिए कर्जदार होने को विवश है।
बरेली में सीएचसी, यूपीएचसी, पीएचसी समेत करीब 71 स्वास्थ्य केंद्र हैं। 15 ब्लॉकों में 54 हेल्थ सेंटर बनने की स्वीकृति शासन ने दे दी है। जल्द ही इनका भी निर्माण शुरू हो जाएगा। करीब दस साल पहले और अब के आंकड़ों पर गौर करें तो जिला अस्पताल में पहले जहां करीब आठ सौ, एक हजार की प्रतिदिन ओपीडी थी, वह अब चार हजार तक पहुंच चुकी है। जिला अस्पताल में निशुल्क डायलिसिस की सुविधा है। वेंटिलेटर भी स्थापित है पर प्रशिक्षित चिकित्सक न होने की वजह से वेेंटिलेटर धूल फांक रहा है।
विज्ञापन

उधर, सभी सीएचसी पर स्वीकृत पदों के सापेक्ष 50 फीसदी भी चिकित्सक तैनात नहीं हैं। लिहाजा, मरीजों को बेहतर इलाज देने का दावा करने वाला स्वास्थ्य विभाग खुद ही विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी से जूझ रहा है। आंकड़ों के अनुसार जिले में विशेषज्ञ चिकित्सकों के 230 पद स्वीकृत हैं, लेकिन इन पदों पर महज 148 विशेषज्ञ चिकित्सक ही तैनात हैं। ऐसे में सरकारी अस्पतालों में भर्ती होने वाले मरीजों को बेहतर इलाज मिलने में अड़चन है। सीएमओ शासन को रिक्त पदों के सापेक्ष भर्ती की मांग कर रहे हैं।
एक , दो चिकित्सक कर रहे हैं इलाज
शासनादेश के अनुसार जिले में प्रत्येक पीएचसी, सीएचसी पर एक विशेषज्ञ चिकित्सक, एक फिजीशियन, एक सर्जन, एक एनेस्थेटिस्ट, एक रेडियोलॉजिस्टि और एक गायनोकोलॉजिस्ट तैनात होने चाहिए। मगर, ज्यादातर सीएचसी पर एक चिकित्साधिकारी की ही तैनाती है। प्रमुख सीएचसी पर दो या किसी पर तीन विशेषज्ञ हैं। शेष कार्य एएनएम और पैरामेडिकल स्टाफ के भरोसे ही चल रहा है। सीएमओ डॉ. बलबीर सिंह ने बताया कि चिकित्सक के रिक्त पदों पर तैनाती के लिए लगातार पत्राचार हो रहा है।
कोविड अस्पताल में नहीं हुई तैनाती
कोरोना महामारी के दौरान सालों से संचालन का इंतजार कर रहे तीन सौ बेड कोविड अस्पताल कोरोना मरीजों के लिए खोला गया था। पर अब तक वहां के आईसीयू, ओपीडी में चिकित्सक की तैनाती नहीं हो सकी है। एक चिकित्सक सीएमएस और एक कोरोना सैंपलिंग का कार्यभार संभाल रहे हैं। कोविड महामारी के दौरान प्रशिक्षित चिकित्सकों के अभाव में वेंटिलेटर का संचालन नहीं हो सका था।
ऑक्सीजन प्लांट से लैस हैं अस्पताल
कोरोना महामारी के बाद चिकित्सा सुविधाएं कई गुना बढ़ गई हैं। जिला महिला अस्पताल, तीन सौ बेड कोविड अस्पताल, इफको आंवला परिसर समेत चार सीएचसी पर ऑक्सीजन प्लांट लग चुका है। जिला अस्पताल में प्लांट लगाने के लिए शासन ने स्वीकृत दे दी है। वहीं, 50 बेड से अधिक क्षमता वाले सभी निजी अस्पतालों में ऑक्सीजन प्लांट लगाने की कवायद चल रही है। कई में लग भी चुके हैं।
विज्ञापन

दस साल में बन गए 70 निजी अस्पताल
आईएमए अध्यक्ष डॉ. विमल भारद्वाज ने बताया कि बरेली में करीब तीन सौ निजी अस्पताल हैं। पिछले दस सालों में करीब 70 नए निजी अस्पताल, नर्सिंग होम बने हैं। पहले दो मेडिकल कॉलेज थे पर एक और मेडिकल कॉलेज बन चुका है। हाई, कैंसर, किडनी ट्रासंप्लांट के विशेषज्ञ चिकित्सक और सर्जन अब जिले में हैं। महानगरों की तर्ज पर बरेली के निजी अस्पतालों में चिकित्सा सुविधा बढ़ती जा रही है।
एक नजर में
- करीब 50 लाख है जिले की आबादी
- 71 स्वास्थ्य केंद्र हैं जिले में
- 16 सीएचसी पर 230 चिकित्सक के पद स्वीकृत
- 148 चिकित्सक तैनात, शेष ने नहीं ले रहे चार्ज
- चार हजार होती है जिला अस्पताल की ओपीडी
- जिला अस्पताल में स्वीकृत 43 पद के सापेक्ष 30 चिकित्सक
- करीब तीन सौ निजी अस्पताल जिले में, दस हजार प्रतिदिन की ओपीडी
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें