कार्रवाई के डर से शटर गिराकर भागे झोलाछाप
गैनी इलाके में किस कदर झोलाछापों का मकड़जाल फैला है, इसका खुलासा सोमवार को हुआ। दोपहर एक बजे स्वास्थ्य विभाग की टीम ब्रह्मदेव अस्पताल को सील करने पहुंची तो इसकी भनक लगते ही आसपास के झोलाछाप और मेडिकल स्टोर संचालक क्लीनिक और दुकानों के शटर गिराकर भागने लगे। टीम ने अस्पताल संचालक के बारे में स्थानीय लोगों से जानकारी ली, लेकिन कोई सटीक जवाब नहीं मिला।
झोलाछाप नियंत्रण सेल की नोडल अधिकारी डॉ. सुचिता गंगवार ने बताया कि नोटिस जारी करने के तीन बाद अस्पताल संचालक ने संपर्क किया था, लेकिन पंजीकरण संबंधी कोई दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए। जच्चा-बच्चा की मौत का मामला संज्ञान में आने पर सोमवार को अस्पताल को सील कर दिया। रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए संचालक के खिलाफ तहरीर भी दी जाएगी।
पीड़ित ने दी तहरीर, 50-60 अस्पतालों पर उठाए सवाल
जोगीठेर गांव के द्वारका प्रसाद ने सोमवार को थाने में तहरीर देकर आशा कार्यकर्ता और ब्रह्मदेव अस्पताल प्रबंधन पर कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने बताया कि गांव की एक आशा कार्यकर्ता के कहने पर वह पत्नी रिंकू देवी (21) को ब्रह्मदेव अस्पताल ले गए थे।
आरोप है कि उस अस्पताल में आरोपी आशा कार्यकर्ता की भतीजी कार्यरत है। गांव के लोग आशा कार्यकर्ताओं के झांसे में आकर अस्पताल चले जाते हैं। आरोप है कि ब्लॉक क्षेत्र में 50-60 अस्पतालों-क्लीनिकों में पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं।
इसके बावजूद आपातकाल में लोगों को इन अस्पतालों और क्लीनिकों का रुख करना पड़ता है, जो जान पर भारी पड़ जाता है। सीओ आंवला हेमंत उपाध्याय ने बताया कि तहरीर के आधार पर कार्रवाई की जाएगी। आशा कार्यकर्ता के संबंध में भी जांच कराई जाएगी।