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गंदगी व जलभराव बनी पीएचसी की पहचान

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तिकुनियां। कस्बे के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र परिसर में कूड़े के ढेर व नालियों का गंदा पानी पीएचसी की पहचान बन गई है। दुर्गंध के कारण यहां लोगों का उठना-बैठना भी मुश्किल हो गया हैं, लेकिन स्वास्थ्य महकमा अस्पताल की साफ-सफाई को लेकर बिल्कुल भी गंभीर नहीं है।
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भारत-नेपाल सीमा का यह इकलौता पीएचसी है। जिससे करीब 50 गांव जुड़े हैं। छह बेड वाले इस अस्पताल की हालत किसी नरक से कम नहीं है। अस्पताल के प्रवेश द्वार से अस्पताल तक आज तक खडंजा तक नहीं लग सका। मुख्य गेट पर कस्बे का गंदा पानी बहता है जिससे गेट पर कीचड़ व जलभराव बना रहता है। अस्पताल की बाउंड्री के अंदर चारों तरफ कूड़ा ही कूड़ा नजर आता है। अस्पताल परिसर में एंबुलेंस के अलावा बाहरी लोगों के वाहन खड़े होने से अस्पताल परिसर पार्किंग स्थल बन चुका है।
तराई विकास संस्थान के महामंत्री सत्य प्रकाश श्रीवास्तव ने बताया अस्पताल गेट से डिलीवरी कक्ष तक जाने का कोई मार्ग नहीं है। अस्पताल भवन का निर्माण ठेकेदार अधूरा छोड़ कर भाग गया। कई बार शिकायत के बावजूद भी यह मार्ग नहीं बना। जिसका खामियाजा मरीज भुगत रहे हैं। कस्बा निवासी नरेश अग्रवाल बताते हैं कि अस्पताल में जाने से डर लगता है। गेट पर ही प्रवेश करना जोखिम से कम नहीं है। पीएचसी के डॉक्टर अरविंद पटेल का कहना है कि अस्पताल की जमीन पर मुकदमा चल रहा है। इसलिए ग्राम प्रधान सड़क निर्माण कराने को तैयार नहीं हैं।
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