बरेली। जिले की सीएचसी-पीएचसी समेत अर्बन सेंटर व नगरीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर दवाइयां खत्म हैं। स्वास्थ्य विभाग ने यूपी सप्लाई मेडिकल कॉरपोरेशन से 48 विभिन्न रोगों की एक करोड़ से अधिक टैबलेट की डिमांड की। इस पर कॉरपोरेशन ने पांच रोगों की सिर्फ ढाई लाख टैबलेट देने की बात कही है। यदि कुछ दिन और दवाइयाें का स्टॉक नहीं आया तो ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य व्यवस्था बेहाल हो जाएगी।
स्वास्थ्य विभाग में दवाइयों की समस्या खत्म होने का नाम नहीं ले रही। एंटीज रैबीज वैक्सीन भी अब तक नहीं आई है। अब करीब 48 विभिन्न रोगों की दवाइयों का स्टॉक भी खत्म हो चला है। सीएचसी और पीएचसी प्रभारी दवाइयों के लिए दौड़ रहे हैं, लेकिन उन्हें दवाइयां नहीं मिल पा रहीं। प्रसव के दौरान आपरेशन करने पर प्रयोग होने वाली एंटीबायोटिक सिप्रोफ्लोक्सिन भी नहीं है। इसकी दस लाख टैबलेट मांगी गई हैं। ऐसे ही जलन, गैस, डायरिया और लूज मोशन जैसी दवाएं भी नहीं हैं। खुजली के लोशन की ग्रामीण क्षेत्रों में अधिक डिमांड है, विभाग ने एक लाख बोतल की डिमांड भेजी, लेकिन यह अब तक नहीं आई। इसके अलावा यूरिन बैग, संक्शन ट्यूब, अंबू बैग, सर्जिकल ग्लोव समेत करीब 48 विभिन्न रोगों की एक करोड़ से अधिक टैबलेट की डिमांड करीब एक सप्ताह पहले ही लगा दी गई है। यहां बता दें कि जिले में 16 सीएचसी-पीएचसी, 22 अर्बन सेंटर और करीब पचास से अधिक नगरीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र है।
सिर्फ ढाई लाख हैं अभी, आकर ले जाओ
यूपी सप्लाई मेडिकल कॉरपोरेशन ने कहा कि अभी उनके पास यह दवाएं नहीं हैं। फिलहाल बुखार, दर्द समेत करीब पांच विभिन्न तरह के रोगों की ढाई लाख टैबलेट हैं आओ और ले जाओ, जबकि शासन के नियमानुसार दवाएं जिले के स्टॉक रूम में पहुंचाने का नियम है, लेकिन कई बार कॉरपोरेशन विभाग के कर्मियों को लखनऊ बुलाकर दवाएं ले जाने को कहता है।
जितने की दवाई, उतने तो लाने में खर्च
जो दवाइयां यूपी मेडिकल सप्लाई कॉरपोरेशन दे रहा है। उनकी कीमत करीब छह से सात हजार रुपये के करीब होगी। विभाग उसे लेने जाने के लिए गाड़ी भेजेगा तो उसका डीजल और किराया भी लखनऊ जाने-आने में लगभग इतना ही खर्च होगा।
डिमांड पत्र बनाकर यूपी सप्लाई मेडिकल कॉरपोरेशन को भेजा जा चुका है। जल्द दवाइयां मिल जाएंगी। मरीजों को किसी तरह की दिक्कत नहीं होने दी जाएगी।
-विनीत कुमार शुक्ल, सीएमओ