बरेली। तीन सौ बेड का सुपर स्पेशलियटी अस्पताल शुरू होने से पहले ही बीमार स्थिति में पहुंच गया है। अस्पताल के कमरों में बंद करोड़ों रुपये के उपकरण और संसाधन धूल फांक रहे हैं। लगाए गए बिजली के बोर्ड प्रयोग से पहले ही टूट चुके हैं। गेट पर लगे शीशे भी टूट चुके हैं। मुख्य सड़क से भवन तक मरीज को ले जाने के लिए अब तक रास्ता भी नहीं बना है। ऐसी बदहाल स्थिति में स्वास्थ्य विभाग शासन से अनुमति मिलते ही ओपीडी शिफ्ट करना चाहता है।
पिछली सपा सरकार में मानसिक अस्पताल की जमीन पर सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल की शुरूआत हुई थी। 73 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट को 2015 में पूरा होना था। बार-बार बिल्डिंग के निर्माण को पूरा करने की तारीख बढ़ती गई। बजट भी रिवाइज किया गया। दो साल से अस्पताल की बिल्डिंग में ओपीडी शुरू कराने का दावा किया जा रहा है, जो अब तक शुरू नहीं हो सकी है। देखरेख के अभाव में अस्पताल की बिल्डिंग में रखे उपकरण और अन्य संसाधन धूल फ ांक रहे हैं। यहां खास यह है कि स्वास्थ्य मंत्री से लेकर प्रमुख सचिव भी इस तीन सौ बेड के अस्पताल का निरीक्षण कर चुके हैं।
सीएमएस डॉ. टीएस आर्या का दावा है कि वह ओपीडी शिफ्ट करने को तैयार हैं, बस शासन से आदेश आने का इंतजार है।
शायद सीएमएस नहीं जानते अस्पताल की स्थिति
सड़क से भवन तक मरीज ले जाने के लिए अभी रास्ता ही तैयार नहीं है। कच्ची सड़क है, गड्डे हैं और उनमें पानी भी भरा है। एक अन्य सड़क है, जिस पर अभी काम चल रहा है। ऐसे में पहुंचने का ही रास्ता नहीं है तो मरीजाें का इलाज कैसे शुरू होगा। अस्पताल के कमरों में बेड भर दिए गए हैं, गद्दे चूहों ने कतर दिए हैं। ऐसे में मरीजों के लिए वहां गद्दे भी नहीं है। ऐसे ही तमाम उपकरणों को उल्टे सीधे तरीके से भर दिया गया है, जिससे वह जंग खा रहे हैं। बिजली के बोर्ड लगा दिए गए हैं, उनका उपयोग नहीं हुआ, लेकिन उससे पहले ही अधिकांश बोर्ड टूट चुके हैं। छत पर पानी की टंकी से अस्पताल में पानी सप्लाई की फिटिंग का काम चल रहा है। कई गेट लगाने का काम अधूरा पड़ा हुआ है। किसी भी कमरे में गेट की ऊपरी खिड़की (वेंटीलेटर) को अब तक नहीं लगाया गया है। इसके अलावा टायल्स का काम पूरे अस्पताल में चल रहा है। खास यह है कि अभी निर्माण इकाई ने अस्पताल को हैंडओवर भी नहीं किया है।
अस्पताल में बेड रखवाए गए हैं। चालू होने पर उन्हें लगवाया जाएगा। वह सुरक्षित है। गद्दे चूहों ने कुतर दिए हैं इसकी उन्हें कोई जानकारी नहीं है। दिखवाया जाएगा। शासन से जैसे ही आदेश आएगा ओपीडी शिफ्ट करा दी जाएगी।
- डॉ. विनीत कुमार शुक्ल, सीएमओ