बरेली। दिल्ली की एक प्राइवेट कंपनी में इंजीनियर आयुषी की कुछ माह पहले बरेली के एक निजी अस्पताल में डॉक्टरों की लापरवाही से जान चली गई थी। वह डेंगू से पीड़ित थी। रात में सीनियर डॉक्टर फिल्म देखने चले गए। इसी बीच आयुषी की तबीयत बिगड़ गई। जूनियर डॉक्टर स्थिति संभाल नहीं पाए और आयुषी की जान चली गई। इसके बाद पिता ने अस्पताल प्रशासन पर रिपोर्ट दर्ज करा दी। तब स्वास्थ्य विभाग ने अस्पताल में मरीज भर्ती करने पर रोक लगा दी।
अस्पताल में नहीं मिला इलाज तो चली गई मतलूब हुसैन की जान
पिछले दिनों आयुष्मान कार्ड होने के बावजूद दीवानखाना के मतलूब हुसैन को शहर के चार बड़े अस्पतालों में इलाज नहीं मिला। परिवार के लोग पूरी रात उन्हें एक से दूसरे अस्पताल में लेकर दौड़ते रहे। आखिर उनकी जान चली गई। स्वास्थ्य विभाग ने जांच कराई तो अस्पतालों की गलती भी सामने आई। कार्रवाई के नाम पर सिर्फ चेतावनी दी गई।
ऑक्सीजन न मिलने पर चली गई वृद्धा की जान
जिला अस्पताल में पिछले दिनों ऑक्सीजन न मिलने पर एक वृद्धा की जान चली गई। परिवार का आरोप था कि नर्स से ऑक्सीजन लगाने को कहा, लेकिन उसने अनसुनी कर दी। वृद्धा काफी बीमार थीं और उन्हें सांस लेने में दिक्कत हो रही थी। आखिर उनकी जान चली गई। इससे कुछ दिन पूर्व भी इमरजेंसी में ऑक्सीजन सप्लाई ठप होने से एक मरीज की जान पर बन आई थी। परिवार के लोगों ने काफी हंगामा किया, इसके बाद सप्लाई दुरुस्त हो सकी।