एसआरएमएस में दो दिवसीय पांचवीं मेडिसिन अपडेट का आयोजन
बरेली। श्री राममूर्ति स्मारक इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल सांइसेज, के मेडिसिन विभाग की ओर दो दिवसीय अन्तरराष्ट्रीय कॉन्फ्रें स का आयोजन किया गया। शनिवार को आयोजन के पहले दिन देश विदेश से आए 400 से अधिक फिजीशियन और पीजी/पोस्ट पीजी के छात्र-छात्राओं ने भाग लिया।
इस दौरान कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. जीसी खिलनानी (एम्स नई दिल्ली) ने कहा आईसीयू का इंफेक्शन सबसे खतरनाक होता है। भारत में इसकी दर ज्यादा है और इस पर काफी काम करने की जरूरत है। इसका उपाय सिर्फ बचाव ही है क्योंकि पिछले 30 साल में कोई नई एंटीबायोटिक दवा नहीं बनी है और आईसीयू के वैक्टीरिया में मौजूदा दवाओं की रोग प्रतिरोधक क्षमता विकसित हो चुकी है। एशियन इंस्टीट्यूट, हैदराबाद से आए डॉ. पीएन राव ने लिवर रोग पर जानकारी दी। कहा, मोटापा सब बीमारियों की जड़ है। इसकी वजह से फैटी लिवर, डायबिटीज जैसी बीमारी भी हो जाती है। आज श्रम घटा है और लोगों का खाना बढ़ा है, जिसकी वजह से मोटापा बढ़ रहा है। इसलिए समय न होने का बहाना किए बिना दिनचर्या बदलें और श्रम शुरू करें। डॉ. विनोद दीक्षित (बीएचयू), डॉ. अनिल अरोरा (सर गंगाराम) ने दवाओं के साइड इफेक्ट पर व्याख्यान दिया।
इंग्लैंड से आए डॉ. राज चंद्रप्पा ने भारत में मेडिकल सुविधाएं अब विश्वस्तरीय हैं तो यूके और यहां, कोई बहुत फर्क नहीं है। उन्होंने बताया कि 5-10 प्रतिशत डेंगू के मरीजो में ब्रेन इंफेक्शन का खतरा भी बना रहता है। इसके लक्षण तीव्र सिर दर्द, दौरे पड़ना और भ्रम की स्थिति होती है। इसकी पुष्टि करने के लिए रीढ़ की हड्डी से पानी निकालकर उसकी जांच की जाती है। हालांकि इस रोग की कोई दवा फिलहाल नहीं है लेकिन सहायक उपचार और मरीज की रोग प्रतिरोधक क्षमता से इसे ठीक किया जा सकता है।
कांफ्रेंस के द्वितीय सत्र में छाती एवं श्वांस संबंधी रोग एवं क्रिटिकल केयर पर नई दिल्ली से आए डॉ. लोकेंद्र कुमार और केजीएमयू से आए डॉ. राजीव गर्ग ने व्याख्यान प्रस्तुत किया। उन्होंने दवा प्रतिरोधी टीबी अज्ञैर सीओपीडी जैसे जटिल रोगों का नवीनतम प्रबंधन जैसे विषयों पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम में संस्थान के चेयरमैन देवमूर्ति, संस्थान के प्रशासनिक निदेशक आदित्य मूर्ति, आयोजन अध्यक्ष डॉ. निर्मल यादव, चेयरपर्सन डॉ. शरद जौहरी, संस्थान के प्राचार्य डॉ. एसबी गुप्ता और सीएमएस डॉ. एके गुप्ता आदि उपस्थित रहे।