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जिला अस्पताल का हाल-  मामलों को रफादफा करने की कार्रवाई है जांच

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बरेली। जिला अस्पताल में पिछले दिनों कई मामलों की जांच शुरू हुई, लेकिन कार्रवाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति करके मामले रफादफा कर दिए गए। फिर चाहें आयुष्मान भारत योजना का कार्ड होने के बावजूद इलाज न मिलने से हुई दीवानखाना के मतलूब हुसैन की मौत का मामला हो या फिर नवाबगंज में आशा कार्यकर्ता को गर्भवती महिलाओं को प्राइवेट अस्पताल में भर्ती कराने पर प्रलोभन देने का मामला। बरेली के एक निजी अस्पताल में हुई इंजीनियर आयूषी की मौत के मामले में भी कोई हल नहीं निकला है। इसके अलावा निजी अस्पतालों में मेडिकल कचरे के निस्तारण की पंद्रह से ज्यादा शिकायतों में ठीक से जांच तक नहीं हुई है। स्वास्थ्य विभाग के अफसर जांच के नाम पर लीपापोती कर मामला निपटा देते हैं।
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मतलूब हुसैन की मौत में अस्पताल को नहीं माना जिम्मेदार
दीवानखाना के मतलूब हुसैन की ह्रदय रोग से मौत हो गई थी। परिजन इलाज के लिए उन्हें शहर के चार अस्पतालों में लेकर गए थे, लेकिन कार्ड होने के बावजूद इलाज नहीं मिला। शासन तक शिकायत हुई। स्वास्थ्य विभाग के अफसरों ने जांच की और अस्पतालों को चेतावनी देकर छोड़ दिया। जब शिकायतें शासन तक पहुंचीं तब कार्रवाई के लिए शासन से निर्देश मांगे गए।
आयूषी के पिता लगाते रहे अफसरों के चक्कर
दिल्ली में एक निजी कंपनी में इंजीनियर आयूषी की मौत इलाज के अभाव में हुई थी। पिता का आरोप था कि सीनियर डॉक्टर फिल्म देखने चले गए और जूनियर डॉक्टरों ने सही से इलाज नहीं किया। आयूषी की मौत के मामले में अभी जांच ही चल रही है। मामला एमसीआई तक पहुंचा उसके बाद अस्पताल में मरीजों की भर्ती पर रोक लगाई गई। आयूषी के पिता ने अफसरों पर मिलीभगत का आरोप लगाया था।
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आशा वर्करों को प्रलोभन देने
की ठीक से नहीं हुई जांच
नवाबगंज में एक सरकारी डॉक्टर ने अपनी पत्नी के अस्पताल में आशा वर्करों को बुलाया और वहां गर्भवती महिलाआें को भर्ती कराने पर कमीशन देने का प्रस्ताव रखा। मामले की शिकायत डीएम तक पहुंची। स्वास्थ्य विभाग के अफसरों ने ठीक से जांच तक नहीं की।
अस्पताल परिसर शराब का
अड्डा बना, नहीं की कार्रवाई
जिला अस्पताल की इमरजेंसी में कई बार शराब की बोतलें पकड़ी गईं। जांच तो हुई, लेकिन कार्रवाई किसी पर नहीं हुई। जांच में कुछ डॉक्टरों के नाम भी सामने आए, लेकिन उनको बचा दिया गया।
मेडिकल कचरे के निस्तारण पर
आंख बंद कर लेते हैं अफसर
पिछले कुछ माह में स्वास्थ्य विभाग के पास मेडिकल कचरे के निस्तारण को लेकर 15 से ज्यादा शिकायतें पहुंचीं। कुछ जगह सीएमओ खुद पहुंचे, लेकिन कोई सुबूत नहीं मिला। बाद में शिकायतों को कचरे के डब्बे में डाल दिया गया, जबकि पीसीबी ने नकटिया स्थित एक अस्पताल पर मेडिकल कचरे के निस्तारण न होने पर ही सवा तीन लाख का जुर्माना लगाया।
आयुष्मान कार्ड से इलाज न मिलने पर क्या कार्रवाई हो इसके स्पष्ट निर्देश नहीं, इसलिए ही मतलूब हुसैन मामले कार्रवाई के लिए शासन से निर्देश मांगे हैं। आयूषी मामले में जांच चल रही है, जो मामले आए उनकी ठीक से जांच की गई। गड़बड़ी मिलती है तो अस्पताल प्रशासन पर कार्रवाई भी की गई है।
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-डॉ. विनीत शुक्ल, सीएमओ
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