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धुंध और मौसम में परिवर्तन से बढ़ा छाती में संक्रमण

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बरेली। मौसम में तेजी से आ रहे बदलाव और आसमान में छाई धुंध स्वास्थ्य पर भारी पड़ रही है। जिला अस्पताल में सर्दी-जुकाम और सांस के रोगियों की संख्या बढ़ती जा रही है। जिला अस्पताल में करीब दो हजार की ओपीडी रही, इसमें 250 से अधिक सिर्फ सांस और दमा के मरीज रहे। प्राइवेट अस्पतालों में ठंड से पीड़ित बच्चों की संख्या बढ़ रही है।
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टीबी एवं चेस्ट स्पेशलिस्ट डॉ. एमएल शर्मा ने बताया कि दो-तीन दिनाें से सांस के रोगी बढ़ गए हैं। इसकी वजह मौसम में बदलाव और वायु प्रदूषण है। धूल के कण सांस नलिकाओं में जाने से संक्रमण फैलता है। इस हालत में मरीज को पीला बलगम, खांसी, छाती में जकड़न, हल्के दर्द की शिकायत रहती है। सांस रोगियों में सीने में दर्द, सांस लेने में दिक्कत, कुछ दूरी तय करने पर सांस फूलने जैसी समस्या है। मौसम बदलने पर पुराना मर्ज भी उखड़ रहा है। बाहर जाते वक्त मास्क जरूर लगाएं। अस्थमा के मरीज इनहेलर की डोज बढ़ा दें। दवाएं बंद कर रखी हैं तो डॉक्टर के परामर्श से शुरू कर दें।
आंखों में जलन, पानी बह रहा
वायु प्रदूषण आंखों के लिए भी नुकसानदेह है। इन दिनों जिला अस्पताल के अलावा प्राइवेट डॉक्टरों के यहां आंखों के मरीज बढ़ गए हैं। वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. हर्षवर्धन ने बताया कि इस समय नेत्र रोगों से जुड़े मरीजों की दैनिक संख्या 200 के पार पहुंच गई है। मरीज आंखों में जलन, पानी बहने, दर्द, चिपचिपाहट, खुजली आदि शिकायतें लेकर पहुंच रहे हैं। बाहर जाते वक्त चश्मा लगाएं, सुबह-शाम धुंध ज्यादा रहता है, ऐसे में जरूरी होने पर ही बाहर निकलें। डॉक्टर के परामर्श से आईड्रॉप का इस्तेमाल करें।
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यह बोले बाल रोग विशेषज्ञ
यह मौसम बच्चों के लिए बेहद खतरनाक है। बच्चे को अगर सर्दी-जुकाम हो गया है तो उसे फौरन डॉक्टर को दिखाएं। बच्चों को गुनगुना पानी पिलाएं। सीने की गर्म कपड़े से सिंकाई भी करें। - डॉ. कर्मेंद्र, बाल रोग विशेषज्ञ।

बढ़ जाती है हृदय रोगियों की धड़कन
तापमान लुढ़कने के साथ ही हृदय रोगियों की धड़कनें बढ़ जाती हैं। शहर के अस्पतालों में सामान्य दिनों की अपेक्षा हृदय रोगियों की संख्या में 20 फीसद की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। हृदय रोग विशेषज्ञों का मानना है कि इस मौसम में पुराने हृदय रोगियों को खास एहतियात बरतने की जरूरत होती है। तापमान लुढ़कने से ह्दय के मरीजों को दिक्कत होती है। खासकर उनके लिए जिन्हें अब तक एक से दो बार दिल का दौरा पड़ चुका है। फिजीशियन डॉ. वागीश वैश्य ने कहा कि ऐसे रोगियों को सुबह व शाम की सैर भी भारी पड़ सकती है। इसलिए उन्हें इस मौसम में विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।
ऐसे करें बचाव
-खान-पान पर ध्यान रखना चाहिए।
-अधिक तेलयुक्त भोजन खाने से बचना चाहिए।
-ब्लड प्रेशर की रेगुलर जांच भी करवानी चाहिए।
-सुबह-शाम की ठंड से जरूर बचाव करें।
-धूप निकलने के बाद ही बाहर निकलें।

सांस रोगियों की चुनौती बढ़ी
सर्दी बढ़ने के साथ ही सांस की नली की संवेदनशीलता तुलनात्मक रूप से बढ़ जाती है, जिससे वह सिकुड़ जाती है। बुजुर्गों में सांस संबंधी समस्याएं कुछ ज्यादा ही बढ़ जाती हैं। दरअसल बुजुर्गों में रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है जिससे खतरा बढ़ जाता है। टीबी एवं चेस्ट फिजीशियन डॉ. वीके धसमाना बताते हैं कि ऐसे में बचाव की जरूरत है। कहा कि सांस के रोगी खासकर दमा के मरीज सर्दी में नियमित रूप से डॉक्टर के संपर्क में रहें। डॉक्टर की सलाह से अपने इन्हेलर की डोज भी दुरुस्त कर लें। ठंड से अपना बचाव करें, गुनगुने पानी से नहाएं, रोगियों को अलाव के धुएं से बचना चाहिए, अन्यथा इससे उन्हें सास का दौरा पड़ सकता है।

सताने लगेगा अब हड्डियों का दर्द
सर्दी के मौसम में जोड़ों का दर्द भी बढ़ जाता है। सीढ़ियां चढ़ने या उठने-बैठने में परेशानी होना, कुछ देर के लिए एक ही मुद्रा में रहने पर मांस पेशियों में अकड़न या दर्द अथवा थोड़ा-सा अधिक दबाव पड़ने पर जोड़ों के हिस्सों में सूजन आना, जोड़ों से आवाज आना कुछ ऐसे लक्षण हैं, जो वृद्धों के साथ-साथ अब युवाओं में भी दिखने लगे हैं। हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. शिव दत्ता ने बताया कि बचाव के लिए गठिया होने पर चिकित्सक से सलाह लें। इसके लिए एक्सरसाइज की जरूरत भी पड़ती है। इससे पीड़ित शौच के लिए कमोड का इस्तेमाल करें, पूजा आदि कार्यक्रमों में ज्यादा देर तक एक ही मुद्रा में न बैठें।
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