बरेली। बदलते मौसम में वायरल फीवर और डेंगू से पूरे शहर में कोहराम मचा हुआ है। शहर के कई हिस्से ऐसे हैं जहां बुखार और डेंगू पीड़ितों की संख्या एकाएक काफी बढ़ गई है। सरकारी अस्पताल से लेकर निजी अस्पतालों में प्रतिदिन मरीजों की भीड़ जुट रही है। हालात बदतर होते देख दो दिन से स्वास्थ्य विभाग की टीमें प्रभावित क्षेत्रों में पहुंच रही हैं। टीमें घरों में लार्वा चेक कर रही हैं तो वहीं लोगों को सफाई के प्रति जागरूक कर रही हैं। मलेरिया अधिकारी के निर्देश पर शनिवार को टीमें सुभाषनगर और गांधी नगर पहुंचीं। यहां डोर टू डोर पहुंचकर फ्रिज, कूलर व छत पर रखे गमलों में लार्वा तलाशा। सुभाष नगर के तीन घरों में मलेरिया व डेंगू के लार्वा मिलने पर नोटिस जारी किए। वहीं रहपुरा चौधरी में बड़ी संख्या में डेंगू और बुखार के केस सामने आने के बाद शनिवार को नगर निगम की सफाई टीमें पहुंचीं।
सुभाषनगर में 35 घरों में तलाशा लार्वा
मलेरिया अधिकारी देशराज सिंह के निर्देश पर शनिवार को मलेरिया इंस्पेक्टर गुलशन गुप्ता, योगेंद्र कुमार सिंह व श्वेता पांडेय ने सुभाष नगर के करीब 35 घरों में पहुंचकर लार्वा तलाशा। यहां राजू, ज्योति स्वरूप और राजीव कुमार के यहां मलेरिया डेंगू के लार्वा मिलने पर उन्हें नोटिस दिया। मलेरिया इंस्पेक्टर गुलशन गुप्ता ने बताया कि इन लोगों के यहां गमलों, फ्रिज के पीछे की ओर लगे वाटर टैंक में लार्वा मिलने पर नोटिस दिया गया है। इसके अलावा भी मोहल्ले के लोगों से बात कर उन्हें मलेरिया के लक्षण और उसके उपाय बताए।
गांधी नगर में भी मिला लार्वा
स्वास्थ्य विभाग की एक टीम गांधी नगर हार्टमन कॉलेज के पास पहुंची और घरों में लार्वा तलाशा। यहां चार घरों में लार्वा मिला। उनको लार्वा खत्म करने के उपाय बताए।
मोहल्ले में बजबजा रहीं नालियां
सुभाष नगर मोहल्ले में नालियां बजबजा रही हैं। गलियों में नाली का गंदा पानी बह रहा है। इसे लेकर भी मोहल्ले के लोगाें में गुस्सा है। मोहल्ले के राजीव, सुभाष, दिनेश और रीता ने बताया कि नालियों में कभी सफाई नहीं होती है। गंदा पानी गलियों में बहता रहता है। इससे यहां से निकलना दूभर है।
मलेरिया के लक्षण
गंभीर मलेरिया के लक्षणों में बुखार और ठंड लगना, बुखार, सिरदर्द और उल्टी, बुखार कम होने पर तेज पसीना और थकान, डायरिया, सांस लेने में तकलीफ और गहरी सांस लेने में परेशानी व बेहोशी जैसी स्थिति होना।
मलेरिया से बचाव के उपाय
टूटे गमले, टायर, कूलर आदि में पानी को जमा न होने दें, पूरी आस्तीन के कपड़े पहने और मच्छरदानी का प्रयोग करें। बाहरी खिड़कियों को जाल से कवर कर रखें। घरों के अंदर डीडीटी दवा का छिड़काव करा सकते हैं। इसके अलावा जहां पानी को जमा होने से नहीं रोका जा सकता है वहां मिट्टी को तेल या मोबिल आयॅल छिड़क सकते हैं।
जिला अस्पताल में डेंगू के छह मरीज पहुंचे
जिला अस्पताल में डेंगू के मरीजों की संख्या फिर बढ़ने लगी है। शनिवार को छह मरीज डेंगू के भर्ती हुए। इसमें दो की हालात ज्यादा गंभीर थी। भर्ती मरीजों में अधिकतर 20-22 साल के युवा हैं। वहीं जिला अस्पताल में मरीजों की संख्या भी बढ़ गई है। शनिवार को दो हजार से ज्यादा मरीज जिला अस्पताल पहुंचे। हैरानी की बात यह है कि इसमें 70 फीसदी से ज्यादा केस बुखार के थे। वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. वागीश वैश्य ने बताया कि वायरल बुखार के मरीजों में इजाफा हुआ है। अब सामान्य बुखार में भी प्लेटलेट्स काफी कम हो रही हैं। पेट दर्द होना, कमजोरी लगना, उल्टी होने की समस्या ज्यादा है।
डेंगू बताकर जांच के नाम
पर चांदी काट रहे लैब वाले
ग्रामीण क्षेत्रों में डॉक्टर डेंगू का खौफ दिखाकर लोगों की जेब काट रहे हैं। सामान्य बुखार में भी वह एनएस-1 और एलाइजा टेस्ट करा रहे हैं। प्राइवेट पैथोलॉजी में एनएस-1 पॉजिटिव आने के बाद जब कुछ मरीजों ने जिला अस्पताल में टेस्ट कराया तो उसमें एनएस-1 की पुष्टि नहीं हुई। पिछले तीन दिन में 50 से ज्यादा मामले ऐसे आ चुके हैं। बाद में इन मरीजों ने जिला अस्पताल में दवा ली। फरीदपुर के रहने वाले सुमित पाल ने प्राइवेट लैब में टेस्ट कराया तो उसमें डेंगू की पुष्टि हुई , लेकिन जिला अस्पताल में हुए टेस्ट में इसकी पुष्टि नहीं हुई। जांच के नाम पर 500 से 1500 रुपये तक वसूले जा रहे हैं। सिर्फ बुखार में ही कई-कई जांचें कराई जा रही हैं।