बरेली। बदलते मौसम में वायरल फीवर मुसीबत बना हुआ है। सरकारी अस्पताल के साथ निजी अस्पतालों में भी बुखार पीड़ित मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। शुक्रवार को जिला अस्पताल में चार सौ से ज्यादा मरीज सिर्फ बुखार के पहुंचे। दो मरीज डेंगू और एक मरीज मलेरिया का पहुंचा। निजी अस्पतालों में भी वायरल फीवर के मरीजों की संख्या एकाएक बढ़ रही है। बुखार आने के बाद तेजी से प्लेटलेट्स कम होने और पेट संबंधी बीमारी होने के मामले सामने आ रहे हैं।
पूरी आस्तीन के कपड़े पहनें
जिला अस्पताल के वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. वागीश वैश्य के अनुसार गर्मी के बाद ठंड शुरू होने के बीच वायरल फीवर के मामले बढ़ते हैं। इन दिनों प्रदूषण भी एक बड़ा कारण बन रहा है। धुंध की चादर होने से गर्मी ऊपर नहीं पहुंच पा रही है। इसलिए कई तरह के वायरस एक्टिव हैं। ठंड शुरू हो जाए तो वायरस कमजोर पड़ने लगेगा और बुखार के केस कम हो जाएंगे। उन्होंने बताया कि इन दिनों प्रतिदिन औसतन तीन सौ से ज्यादा मरीज सिर्फ वायरल फीवर के आ रहे हैं। उन्होंने बचाव के सुझाव दिए कि फुल कपड़े पहनें, साफ सफाई रखें, प्रदूषण बढ़ा तो बाहर मास्क पहनकर निकलें। अगर बुखार की शिकायत हो तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं।
प्रदूषण के कारण वायरस हो रहा ज्यादा खतरनाक
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रेम कुमार के अनुसार इस बदलते मौसम में वायरस कम एक्टिव होते हैं, लेकिन वातावरण में इन दिनों प्रदूषण का स्तर बढ़ा है तो यह वायरस ज्यादा ताकतवर है। उन्होंने बताया कि वायरस बच्चों पर ज्यादा हमला कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि प्रतिदिन 30 से ज्यादा मरीज सिर्फ बुखार के आ रहे हैं। शुक्रवार को 85 मरीज उनके यहां पहुंचे, जिसमें अधिकतर वायरल फीवर के थे। छह केस निमोनिया के आए। उनका मानना है कि इस बार डेंगू ज्यादा खतरनाक स्थिति में नहीं है, लेकिन बुखार का दूसरा रूप खतरनाक है, जिसमें छोटे बच्चों की सांस की नली सिकुड़ जाती है।
दिवाली पर खानपान ने भी बिगाड़ी सेहत
वरिष्ठ सर्जन डॉ. सुशील टंडन के अनुसार दिवाली पर बिगड़े खानपान का भी नतीजा है कि इतनी बड़ी संख्या में पेट संबंधी बीमारी के मरीज बढ़े हैं। उन्होंने बताया कि वायरल फीवर से तो लोग प्रभावित हैं ही, साथ ही बुखार के बाद भी कई समस्याएं सामने आ रही हैं। पेट संबंधी बीमारी के 25 फीसदी केस बढ़े हैं। लूज मोशन होना, पेट दर्द करने जैसी समस्या आ रही है। बदलते मौसम में खानपान का विशेष ख्याल रखने की सलाह दी।