बरेली। शासन के आला अधिकारियों की समीक्षा में साफ बचकर निकल जाने वाले जिले के विभागीय अफसरों पर मंगलवार को पहली बार नोडल अफसर नामित की गईं महिला अधिकारियों की समीक्षा में काफी बुरी बीती। कई अधिकारी न विभागीय योजनाओं का हाल बता पाए न नोडल अफसरों के सवालों का जवाब दे पाए। एसीएमओ डॉ. आरएन गिरी को तो एचआईवी की फुल फॉर्म न बता पाने पर तगड़ी लताड़ लगी। मुरादाबाद में तैनात आईपीएस अपर्णा गुप्ता ने उन्हें डांटते हुए न सिर्फ मीटिंग से निकाल दिया बल्कि यह तक कह दिया कि सीएम को रिपोर्ट मिलेगी तो वह तुरंत सस्पेंड हो जाएंगे।
विकास भवन में हुई समीक्षा बैठक में नोडल अफसर आईपीएस अपर्णा गुप्ता, सीतापुर में तैनात पीसीएस अफसर किंशुक श्रीवास्तव और शाहजहांपुर की आईएफएस अफसर श्वेता ने एक-एक कर अधिकारियों की क्लास ली। सबसे ज्यादा बुरी एसीएमओ डॉ. आरएन गिरी के साथ बीती। सीएमओ के प्रतिनिधि के तौर पर प्रेजेंटेशन देने एसीएमओ ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग ने इस साल 1258 का एचआईवी टेस्ट किए हैं जिनमें से 309 का इलाज किया हुआ है। आईपीएस अपर्णा गुप्ता ने पूछा कि बाकी को क्यों छोड़ दिया तो वह जवाब नहीं दे पाए।
नाराज होकर अपर्णा गुप्ता ने एसीएमओ से अपने आंकड़ें कचरे के डिब्बे में फेंक देने को कहा। एसीएमओ ने यह भी नहीं बता पाए कि 151 एचआईवी पॉजिटिव में से कितनों से संपर्क किया गया। इस पर अपर्णा गुप्ता ने उनसे एचआईवी और पीपीटीसीटी की फुलफॉर्म पूछ ली। वह यह भी नहीं बता पाए तो अपर्णा गुप्ता बोलीं, जब कुछ पता ही नहीं तो बैठक में क्यों आए। झल्लाते हुए उनसे बैठक से चले जाने को कहा। बोलीं, सीएमओ को भेजिए, उन्हीं से बात होगी। यह भी कह दिया कि सीएम साहब को पता लग जाए तो तुरंत सस्पेंड हो जाओगे। इसके बाद शाम छह बजे सीएमओ डॉ. विनीत शुक्ल नोडल अफसरों से मिलने पहुंचे लेकिन मुलाकात नहीं हो सकी। इससे पहले नोडल अफसरों की टीम ने सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल स्थित महिला बाल विकास आयोग के सखी वन स्टाप सेंटर का निरीक्षण किया। इस दौरान जिला प्रोबेशन अधिकारी नीता अहिरवार भी मौजूद रहीं।
डीपीआरओ से बोलीं- क्या बकवास रिपोर्ट बनाई है
पंचायती राज विभाग के प्रेजेंटेशन पर भी नोडल अफसरों ने कड़ी नाराजगी जताई। आईपीएस अपर्णा गुप्ता ने यहां तक कह डाला कि क्या बकवास रिपोर्ट बनाई है। डीपीआरओ से राष्ट्रीय ग्राम स्वराज योजना के उद्देश्य पूछने पर जवाब नहीं दे पाए। गांव की महिला प्रतिनिधियों के बारे मे की जानकारी मांगी तब भी चुप्पी साध गए। इस पर अपर्णा गुप्ता बोलीं कि जब उनको जानते ही नहीं तो उनकी भागीदारी कैसे सुनिश्चित करोगे। गांवों में सिर्फ दिखावे के लिए महिला प्रधान हैं। डीपीआरओ को दोबारा रिपोर्ट तैयार कराकर देने को कहा। जिला उद्योग एवं उद्यम प्रोत्साहन केंद्र के आंकड़े देखकर भी नोडल अफसरों ने कड़ी नाराजगी जताई। बोलीं कि फर्जी आंकड़े मत दिखाइए, अगर महिलाओं को लाभ मिला हो तो उनकी सूची दीजिए। उनसे बात की जाएगी। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के आंकड़ों पर भी टीम संतुष्ट नहीं हुई। 2014 में शुरू हुए स्वयं सहायता समूह की 2019 में क्या स्थिति है, अधिकारी यह नहीं पाए।
बच्चे क्यों नहीं आते स्कूल.. बीएसए भी चुप
बीएसए तनुजा त्रिपाठी ने जिले भर में ड्राप आउट बच्चों की संख्या 2270 बताई। इन बच्चों का एडमिशन क्यों नहीं हुआ, वह इसका जवाब नहीं दे पाईं। जब अभिभावकों के साथ मीटिंग करने की बात पूछी तो फिर बगलें झांकने लगीं। टीम ने बीएसए से कहा आंकड़े दुरुस्त करने के बजाए पढ़ाई का स्तर सुधरवाएं। माध्यमिक शिक्षा विभाग के अफसर भी रिपोर्ट नहीं दे पाया।
आखिर में पहुंची सीओ द्वितीय सीमा यादव
पुलिस विभाग की तरफ से प्रेजेंटेशन न होने पर अफसरों ने नाराजगी जताई। आईपीएस अपर्णा गुप्ता का कहना था कि जिले में अपराधों की जानकारी बिना प्रेजेंटेंशन के कैसे पता चलेगी। पुलिस विभाग का कोई अधिकारी नहीं था। समीक्षा बैठक खत्म होने के वक्त सीओ सीमा यादव पहुंची। उन्होंने बुधवार को पूरी रिपोर्ट देने को कहा। जिला कार्यक्रम अधिकारी को भी डांट खानी पड़ी।
मटके मिली बच्ची के बारे में दो बार पूछा
जिला प्रोबेशन अधिकारी ने श्मशान भूमि में मिली नवजात के बारे में बताया तो आईपीएस अपर्णा गुप्ता ने उस बच्ची की पूरी दिलचस्पी से जानकारी ली। बच्ची कहां है और उसके स्वास्थ्य कैसा यह जानकारी ली। फिर बैठक के आखिर में भी उन्होंने उस बच्ची के बारे में पूछा।
कस्तूरबा ठीक, महिला थाने के हाल पर नाराज
समीक्षा बैठक के बाद टीम क्यारा के कस्तूरबा स्कूल पहुंची। यहां व्यवस्था ठीक मिलने के बाद टीम महिला थाने उन्होंने थाने के रजिस्टर, केस और उनकी प्रगति रिपोर्ट देखी तो नाराजगी जताई। डीजीपी के ताजा निर्देशों के बारे में पूछा तो महिला पुलिस कर्मी जवाब नहीं दे पाईं। कुछ केस देखे और उनकी डिटेल पूछी तो आईओ जवाब नहीं दे पाई।