बरेली। अपराधी अगर एसएसपी आवास के बाहर खड़े इंस्पेक्टर का मोबाइल लूट ले जाए और मच्छर जिला अस्पताल में डेंगू का इलाज करने वाले डॉक्टर को ही काटकर डेंगू का शिकार बना दे तो सिस्टम चाहे जो सफाई दे लेकिन पब्लिक की उम्मीदें कहीं न कहीं टूटती ही हैं। शहर में हाल ही में हुईं ये दोनों घटनाएं सिस्टम की हालत का प्रमाण बन गई हैं। इंस्पेक्टर का मोबाइल पिछले पखवाड़े लूट लिया गया था, अब जिला अस्पताल के सीनियर फिजीशियन डॉ. बागीश वैश्य डेंगू का शिकार होकर घर बैठ गए हैं। डेंगू होने के बाद उन्होंने जिला अस्पताल में फागिंग पर जोर दिया है।
जिले में हाल ही में फैल्सीपेरम और मलेरिया अच्छा-खासा कहर बरपा चुका है। तमाम लोगों की जान चली गई, सैकड़ों लोग इलाज कराने के चक्कर में कर्जदार हो गए लेकिन स्वास्थ्य विभाग ने इस बुखार से एक मौत होना भी कबूल नहीं किया। फैल्सीपेरम और मलेरिया के बाद अब डेंगू का प्रकोप बढ़ रहा है। कुछ ही दिनों में डेंगू के मरीजों की संख्या 68 तक पहुंच चुकी है। जिला अस्पताल में डेंगू मरीजों का इलाज करने वाली टीम के अगुवा डॉ. बागीश वैश्य ही थे। उनके साथ दो और फिजीशियन डॉ. आशु अग्रवाल और डॉ. अजय मोहन भी हैं। डॉ. वैश्य को कुछ दिन से बुखार आ रहा था। शनिवार को उन्होंने जिला अस्पताल की लैब में ब्लड टेस्ट कराया। रिपोर्ट में एनएस- 1 पॉजिटिव आया तो जिला अस्पताल के दूसरे डॉक्टरों में भी हड़कंप मच गया।
डॉ. वैश्य इसके बाद ज्यादा कुछ तो खुलकर नहीं कह पाए लेकिन जिला अस्पताल में मच्छरों को इसकी वजह मानते हुए इतना जरूर कहा कि कहा कि अस्पताल में फॉगिंग होनी चाहिए। डॉ. बागीश वैश्य ने बताया कि मच्छरों के कारण ही डेंगू एक शरीर से दूसरे शरीर में पहुंचता है। उन्होंने कहा कि इस समय मौसम ठंडा जरूर हो रहा है लेकिन इसके बावजूद मच्छरों से बचने के लिए मच्छरदानी का उपयोग करना जरूरी है। डेंगू के केस लगातार आ रहे हैं इसलिए किसी को भी अगर बुखार आ रहा है तो वह खून की जांच जरूर करा ले।
वैश्य जिला अस्पताल में दूसरे डेंगू पीड़ित डॉक्टर
जिला अस्पताल में कुछ ही दिन पहले एक और डॉक्टर को डेंगू हो चुका है। दरअसल राजकीय आयुर्वेदिक कॉलेज के डॉ. सर्वेश शर्मा की कुछ दिनों के लिए जिला अस्पताल में ड्यूटी लगाई गई थी। जिला अस्पताल में ड्यूटी करने के दौरान ही वह डेंगू का शिकार बन गए। अब डॉ. वैश्य को भी डेंगू हो गया।
जिला अस्पताल में मच्छरों का पुराना बसेरा
जिला अस्पताल के मलेरिया वार्ड के सामने पाइप लाइन फटने से कई दिन तक पानी सड़क पर बहता रहा। आसपास पानी इकट्ठा हो जाने से मच्छरों की भरमार हो गई। अस्पताल में इधर-उधर गंदगी के ढेर लगे रहना भी आम बात है। प्रभारी मंत्री श्रीकांत शर्मा के निरीक्षण के दौरान भी इधर-उधर गंदगी पाई गई थी। बताया जा रहा है कि जिला अस्पताल में काफी समय से फॉगिंग नहीं हुई है, जिस वजह से मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया है। संभवत: इसी कारण डॉ. वैश्य ने जिला अस्पताल में फॉगिंग कराने को कहा। सीएमएस डॉ. टीएस सिंह आर्या ने कहा कि अगर फॉगिंग नहीं हुई होगी तो कराई जाएगी।
आठ महीने पहले नगर निगम से कराई थी फॉगिंग
नगर निगम के मुख्य सफाई निरीक्षक एके दुबे का कहना है कि जिला अस्पताल प्रशासन जब भी नगर निगम को सूचित करता है तो वहां फॉगिंग करा दी जाती है। पिछली बार करीब सात-आठ महीने किसी वीआईपी कार्यक्रम से पहले जिला अस्पताल के अधिकारियों ने नगर निगम को पत्र लिखा था तब वहां फॉगिंग कराई गई थी। एके दुबे का कहना है कि वैसे मलेरिया का स्वास्थ्य विभाग का अपना विभाग है जहां दवाइयां भी आती हैं लिहाजा फॉगिंग कराने में उन्हें कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए।
नहीं मिला इंस्पेक्टर का मोबाइल, जांच बंद
एसएसपी आवास के बाहर इंस्पेक्टर का मोबाइल लूट ले जाने और पीछा करने पर सिपाही को तमंचा तानकर धमका देने की घटना के बाद पुलिस करीब हफ्ते भर तक चुपचाप लुटेरों को तलाश करने की कोशिश करती रही लेकिन कामयाब नहीं हो पाई। सर्विलांस सेल भी लुटेरों को तलाश करने में कोई मदद नहीं कर पाई। आखिरकार पुलिस ने यह जांच बंद कर दी।