जिला अस्पताल की इमरजेंसी के शौचालय में नवजात का शव मिलने से स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों में खलबली मची हुई है। सूचना मिलते ही अफसर इमरजेंसी पहुंचे। जिला अस्पताल और महिला अस्पताल का रिकॉर्ड खंगाला गया। पिछले दो-तीन दिन में जिन महिलाओं का प्रसव हुआ है, उनकी पड़ताल की गई। महिला अस्पताल में जन्मे सारे बच्चे सुरक्षित हैं। सीसीटीवी फुटेज भी खंगाली गई लेकिन ऐसा कोई सुराग नहीं मिला, जिससे यह पता चल सके कि बच्चा कौन डालकर गया।
बुधवार सुबह जिला अस्पताल की इमरजेंसी में एक नवजात बच्चे का शव शौचालय में फंसा मिला था। सूचना पर अधिकारी मौके पर पहुंचे। छानबीन से भी स्पष्ट नहीं हो सका कि बच्चा कहां से आया। हालांकि चर्चा रही कि एक गर्भवती महिला इमरजेंसी में तबीयत खराब होने का बहाना करके भर्ती हुई। वह शादीशुदा थी या कुंवारी यह भी स्पष्ट नहीं हो सका। उसका समय से पहले प्रसव कराया गया। हालांकि सीएमएस ने यह बात खारिज कर दी। एक महिला का जिक्र करते हुए बताया कि वह दो तीन माह की गर्भवती थी, उसका इलाज किया गया।
जिला महिला अस्पताल की सीएमएस डॉ. अलका शर्मा का कहना है कि उनके यहां 16 नवजात बच्चे हैं। सभी सुरक्षित हैं। यह बच्चा बाहर से लाकर डाला गया। जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. टीएस सिंह आर्या का कहना है कि बच्चा करीब 7-8 माह का है। बच्चा उनके अस्पताल में नहीं जन्मा है। उन्हाेंने संभावना जताई कि बुधवार तड़के यह बच्चा बाहर से लाकर यहां डाला गया। अस्पताल को बदनाम करने की साजिश है। प्रीमैच्योर डिलीवरी हुई है सो यह बच्चा मृत ही जन्मा होगा। फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है।