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प्रभारी मंत्री की सख्ती का नहीं दिखा असर, न आरओ सही हुआ... न हुई सफाई

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बरेली। प्रदेश के ऊर्जा मंत्री और जिले के प्रभारी मंत्री की सख्ती का जिला अस्पताल पर कोई खास असर नहीं पड़ा। उनके आने के खौफ में व्यवस्थाएं दुरुस्त करने में जुटा अस्पताल प्रशासन मंत्री के जाने के बाद बेखबर सा नजर आया। यही कारण रहा कि शुक्रवार को भी व्यवस्थाएं मुकम्मल नहीं दिखीं। मंत्री के आपत्ति जताने के बाद भी न आरओ सही हुआ, न ही सफाई व्यवस्था पर कोई खास ध्यान दिया गया। अस्पताल में जगह-जगह गंदा पानी भरा रहा। गंदगी और मेडिकल वेस्ट के ढेर भी दिखाई दिए।
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जिले के प्रभारी मंत्री को निरीक्षण के दौरान अस्पताल में तमाम अव्यवस्थाएं मिली थीं। नाराजगी जताते हुए प्रभारी मंत्री ने 15 दिन के भीतर व्यवस्थाओं में सुधार के निर्देश दिए थे, लेकिन अगले दिन भी व्यवस्थाओं में ज्यादा सुधार देखने को नहीं मिला। मंत्री की नाराजगी के बाद इमरजेंसी के पास से डस्टबिन हटा दिया गया। लेकिन इमरजेंसी के सामने ही सेप्टिक टैंक की नाली के मेनहोल को पूरी तरह से नहीं ढका गया। अस्पताल में जगह-जगह गंदा पानी भरा हुआ भी दिखा। मेडिकलवेस्ट के ढेर भी लगे नजर आए। यह स्थिति तब रही जब प्रभारी मंत्री ने निरीक्षण के दौरान सबसे ज्यादा जोर सफाई व्यवस्था पर ही दिया था। इसको लेकर सीएमएस डॉ. टीएस आर्य को फटकार भी लगाई थी। निरीक्षण के दौरान मंत्री ने आरओ का पानी पीकर देखा था। आरओ ठीक काम नहीं कर रहा था। शुक्रवार को इसे ठीक कराने के लिए मैकेनिक बुलाए गए, लेकिन आरओ का वाटर कुलिंग सिस्टम पूरी तरह ठीक नहीं हो सका है।

बच्चा वार्ड में भी नहीं दिखा सख्ती का असर
बच्चा वार्ड में शुक्रवार को भी सुधार नहीं दिखा। तीमारदारों की भीड़ की वजह से यहां अव्यवस्थाएं दिखीं। प्रभारी मंत्री ने बच्चा वार्ड में अव्यवस्थाओं को लेकर भी नाराजगी जताई थी। बाल रोग विभाग ने ज्यादा ध्यान देना जरूरी ही नहीं समझा। भर्ती बच्चों के बेड पर भी तीमारदार बैठे दिखे।
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ओपीडी से नदारद रहे कुछ डॉक्टर
मंत्री के निरीक्षण के दौरान ओपीडी में सभी डॉक्टर सुबह से ही बैठ गए थे। व्यवस्थाएं भी ठीक रहीं। ओपीडी ओ लेकर प्रभारी मंत्री ने कोई तल्ख टिप्पणी भी नहीं की थी। लेकिन अगले ही दिन शुक्रवार को कुछ डॉक्टर अपने केबिन से नदारद दिखे, जबकि ओपीडी मरीजों की अच्छी खासी भीड़ थी। डॉक्टरों के न मिलने से मरीजों को परेशानियों का सामना करना पड़ा।
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