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आंवला में सील हुआ तो रामनगर में खोल लिया अस्पताल

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आंवला (बरेली)। स्वास्थ्य विभाग की अफसरों की शह पर गैर जानकार लोग अस्पताल खोलकर मरीजों से उगाही कर रहे हैं। रामनगर में हाल ही में खोले गए लीलावती अस्पताल के मामले में ऐसा ही है। अस्पताल के संचालक का दूसरा अस्पताल दो महीने पहले तक आंवला में चल रहा था जो एक महिला की इसी तरह मौत के बाद जांच में गलत पाकर सील कर दिया गया।
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अस्पताल संचालक डॉ. मनोज का जीवन ज्योति अस्पताल जुलाई माह के अंत में बंद कराया गया था। तब बिलौरी गांव की एक महिला की डिलीवरी के बाद उसे भी हीमोग्लोबिन कम बताकर खून चढ़ाया जा रहा था। इसी दौरान हालत बिगड़ने से उसकी मौत हो गई। परिवार ने हंगामा कर रिपोर्ट कराई। मीडिया में इस प्रकरण को प्रमुखता से प्रकाशित किया गया तो स्वास्थ्य विभाग को अपनी जांच में अस्पताल की खामियां दिखानी पड़ीं। तब एसीएमओ डॉ. रंजन गौतम ने अस्पताल को सील कर दिया।
उसके बाद ही डॉ. मनोज ने हरिदासपुर में लीलावती जनरल अस्पताल खोल लिया। करीब महीने भर पहले अस्पताल का शुभारंभ हुआ। कहने को अस्पताल पर डॉ. अतुल सक्सेना का उनकी डिग्री के साथ बोर्ड लगा है पर किसी स्थानीय शख्स ने आज तक डॉ. सक्सेना को यहां बैठे नहीं देखा। अस्पताल में इलाज से लेकर प्रबंधन के सारे काम डॉ. मनोज करते हैं। उन पर क्या डिग्री है, इस बारे में वे खुलकर बताते भी नहीं। कहते हैं कि वे अस्पताल के मैनेजिंग डायरेक्टर हैं और देखरेख का काम ही करते हैं। हालांकि डॉ. इस सवाल का भी जवाब नहीं दे पा रहे कि शनिवार को महिला का ट्रीटमेंट वे ही कर रहे थे और इसीलिए भीड़ के गुस्से का शिकार हो गए।
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समझौता करा दिया पर नहीं की कार्रवाई
- अस्पताल के बाहर मारपीट के मामले में डॉक्टर और पीड़ित पक्ष में आर्थिक समझौते के दौरान पुलिस और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे। बावजूद अस्पताल के खुलने, संचालन के कागजात, व्यवस्था और कानून हाथ में लेकर सड़क पर कोहराम काटने के मामलों में न तो किसी तरह की जांच और न ही कार्रवाई की गई। एसडीएम ने इसे स्वास्थ्य विभाग का मामला बता दिया तो सीओ का कहना था कि पीड़ित पक्ष की तहरीर न मिलने पर पुलिस ने कार्रवाई नहीं की। अगर स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी कार्रवाई कराएंगे तो पुलिस कर देगी।

सीएमओ से लेकर एसीएमओ तक ने कन्नी काटी
- एक अस्पताल सील होने के बाद खोले गए दूसरे अस्पताल की वैधता जांचने को लेकर पूरा सेहत महकमा टालमटोल कर रहा है। जिले में स्वास्थ्य सेवाओं के मुखिया सीएमओ डॉ. विनीत शुक्ला का कहना है कि अस्पताल की वैधता और शिकायतों पर कार्रवाई का काम वे नहीं देखते, इसकी जिम्मेदारी उन्होंने एसीएमओ को दे रखी है। उन्हीं के स्तर से जांच व कार्रवाई होगी। पहला अस्पताल सील करने वाले एसीएमओ डॉ. रंजन गौतम का कहना था कि सीएमओ सर ने उन्हें अब दूसरे पटल का काम दे रखा है, इसलिए वे इस मामले में कुछ नहीं बता सकते। एसीएमओ डॉ. अशोक का कहना था कि अस्पतालों की जांच का काम उन्हें हाल ही में मिला है। इसलिए अस्पताल कौन सही है और कौन गलत है, ये अभी उन्हें सही से जानकारी नहीं है। कुछ समय में स्थिति समझेंगे तभी बता पाएंगे।
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