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लखनऊ से आई टीम को नहीं मिले डेंगू के लार्वा

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बरेली। बीते साल जिले में मलेरिया के हमले के बाद अबकी डेंगू के मरीज सामने आने पर स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मचा हुआ है। शनिवार को लखनऊ की स्वास्थ्य विभाग की टीम एसआरएमएस पहुंची और मरीजों का हाल जाना। साथ ही, परिसर में डेंगू के लार्वा तलाश किए, लेकिन कहीं भी लार्वा नहीं मिले। टीम ने मलेरिया विभाग को डेंगू और मलेरिया की रोकथाम के निर्देश दिए।
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पिछले दिनों स्वास्थ्य मंत्री की समीक्षा बैठक में डेंगू की पॉजिटिव रिपोर्ट छिपाने पर स्वास्थ्य विभाग पर सवालिया निशान लग रहे हैं। मामले पर शासन ने सीएमओ से जवाब तलब किया गया तो उन्होंने निजी अस्पतालों नोटिस जारी किए। इस पर निजी अस्पतालों की ओर से दिए गए जवाब में इंटीग्रेटेड डिजीज सर्विलांस प्रोग्राम (आईडीएसपी) को 7 अगस्त को ही सूचना देने की बात कही गई। मामले पर सीएमओ ने आईडीएसपी से स्पष्टीकरण मांगा है। साथ ही शासन को भी रिपोर्ट सौंप दी है। दूसरी ओर, एसआरएमएस में लेडी डॉक्टर समेत 4 स्टूडेंट्स को डेंगू होने की सूचना पर लखनऊ से डॉ. विकास सिंघल के निर्देशन में आई टीम ने मलेरिया विभाग के साथ एसआरएमएस कैंपस का निरीक्षण किया। डेंगू के मरीजों का हाल जाना और परिसर में डेंगू के लार्वा की तलाश की लेकिन कहीं भी डेंगू के लार्वा नहीं मिला। इस पर संभावना जताई जा रही है कि पीड़ितों को कहीं और से डेंगू के मच्छरों ने काटा है।

तो क्या मरीजों को कहीं और लगा डेंगू का डंक
लखनऊ से आई टीम ने एसआरएमएस कैंपस के लैब, आस पास के क्षेत्र, हॉस्टल और डेंगू के लार्वा पनपने के संभावित स्थलों का निरीक्षण किया। बताते हैं कि गहनता से की गई जांच के बावजूद टीम को कहीं भी डेंगू के लार्वा या एडीज मच्छर नहीं मिले। ऐसे में टीम ने पीड़ित डेंगू के मरीजों को कहीं और डंक लगने की आशंका जताई है। हालांकि, टीम ने मलेरिया विभाग को मच्छरों की तादाद बढ़ने से रोकने के साथ ही, जानलेवा मच्छर पाए जाने की स्थिति में तत्काल मुख्यालय को सूचना देने के निर्देश दिए गए हैं।
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बढ़े मलेरिया पीड़ित, अस्तपाल में बेड कम पड़े
जिले में डेंगू के मरीज सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग की ओर से लगाए गए कैंप में अब तक तीन सौ से अधिक मलेरिया पीड़ित मिल चुके हैं। जिन्हें सीएचसी और पीएचसी समेत जिला अस्पताल के मलेरिया वार्ड में भर्ती कराया गया है। शनिवार को तीन और मलेरिया पीड़ितों को भर्ती किया गया है। वहीं, बुखार पीड़ितों की तादाद बढ़ने से बेड भरने शुरू हो गए हैं। एक-एक बेड पर दो मरीजों का इलाज करना पड़ रहा है।

मलेरिया पीड़ितों को सीमित संसाधन में बेहतर इलाज मुहैया कराना हमारी प्राथमिकता है। मलेरिया या डेंगू के वार्ड में सामान्य बुखार पीड़ितों को नहीं रखा जा सकता है। बेड कम हैं इसलिए एक बेड पर दो मरीजों का इलाज करना पड़ रहा है। - डॉ. टीएस आर्या, सीएमएस
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