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नवीनीकरण और फर्जी डिग्री प्रकरण- शासन को भेजा गया अस्पतालों और लिपिक के गठजोड़ का ‘पक्का चिट्ठा’

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पीलीभीत। फर्जी डिग्री पर चल रहे अस्पतालों की हकीकत उजागर होने और रिन्यूवल में हो रही अनियमितताओं की रिपोर्ट जिलाधिकारी ने प्रमुख सचिव को भेज दी है। पंजीकरण, नवीनीकरण और फर्जी डिग्री मामले में मुख्य भूमिका निभाने वाले लिपिक पर अभी तो कोई कार्रवाई नहीं हुई। लेकिन ऐसा माना जा रहा है कि लिपिक समते कुछ अफसरों की गर्दन फंसनी तय है। क्योंकि डीएम ने स्पष्ट कहा कि गड़बड़ी हुई है।
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जिले में प्राइवेट स्वास्थ्य सुविधाओं की बात करें तो सरकारी आंकड़ों में सिर्फ 80 अस्पताल पंजीकृत हैं। जबकि हकीकत में तीन सौ से अधिक अस्पतालों में मरीजों को देखकर दवाएं देने के साथ सर्जरी भी धड़ल्ले से की जा रही है। सूत्र बताते हैं कि कई सालों से सीएमओ कार्यालय में पंजीकरण और रिन्यूवल का पटल एक ही लिपिक पर था। कई बार लिपिक का पटल बदला गया लेकिन उसके रसूख और राजनीतिक दबाव के चलते वह पुन: उसी पटल पर आ गया। यही वजह रही कि पंजीकरण और रिन्यूवल के समय कार्यालय में बैठे बैठाए ही सारे सत्यापन कर रिपोर्ट शासन को भेज दी जाती है। इसकी हकीकत चंद दिन पूर्व वेंटिलेटर पर लाश का इलाज करने पर सील हुए अस्पताल पर हुई कार्रवाई से साफ हो चुका है। इस मामले में भी लिपिक की लापरवाही उजागर हुई थी। डॉक्टर के ऑपरेशन करने पर रोक लगाने संबंधी आदेश का पत्र गायब कर दिया गया था। फर्जी डिग्री वाले कई अन्य अस्पतालों के नाम भी प्रकाश में आए। इसके बाद कार्रवाई होने के डर से लिपिक ने अपने रसूख का इस्तेमाल कर सत्ताधारी नेताओं से पैरवी कराना शुरू कर दी। लिहाजा प्रशासन ने कार्रवाई की गेंद शासन के पाले में डाल दी।

इन अस्पतालों पर भी कसेगा शिकंजा
बिंना पंजीकरण नकटादाना स्थित लाइफ लाइन अस्पताल को पिछले दिनों सील कर दिया था। जांच में पता चला था अस्पताल प्रबंधक के पास बीएएमएस की डिग्री है। उन्होंने क्षेत्रीय यूनानी एवं आयुर्वेदिक कार्यालय में क्लीनिक में पंजीकरण करा रखा था। वैधता तीन माह पूर्व समाप्त हो चुकी थी। यहां ऑपरेशन भी किए जा रहे थे। इसके अलावा दो अस्पताल और भी शामिल हैं।
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माधोटांडा रोड स्थिति अस्पताल पर प्रशासन शिकंजा कसेगा। डीएम के यहां हुई शिकायत में बताया गया कि मैकूलाल अस्पताल पर कार्रवाई के बाद से इस अस्पताल का शटर गिरा है। अस्पताल का पंजीकरण क्षेत्रीय यूनानी एवं आयुर्वेदिक कार्यालय में था। जिसकी 20 मार्च को वैधता खत्म हो चुकी है। यहां भी ऑपरेशन किए जा रहे थे। माधोटांडा रोड स्थित एक अन्य क्लीनिक की जांच शुरू कर दी गई है।

मैकूलाल प्रकरण से स्पष्ट हो चुका है कि सीएमओ कार्यालय में अस्पतालों के पंजीकरण और उनके लाइसेंस रिन्यूवल में अनियमितताएं बरती गई हैं। पटल सीएमओ कार्यालय के लिपिक नाहिद खां पर लंबे समय से था। लिहाजा मामले की गहनता से जांच पड़ताल कर रिपोर्ट प्रमुख सचिव को भेज दी गई है। एक अन्य गायत्री अस्पताल के मामले में भी जांच कराई जाएगी।
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-वैभव श्रीवास्तव, डीएम
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