पूरनपुर (पीलीभीत)। स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाल तस्वीर बदलने का नाम नहीं ले रही। चार दिन पहले एक महिला ने प्रसव कक्ष तक जाने के लिए स्ट्रेचर न मिलने पर बच्चे को ठेले पर जन्म दिया था। बुधवार को फिर एक महिला ठेले पर बच्चा जनने को मजबूर हुई। उस वक्त प्रसव कक्ष में एक अन्य महिला की डिलीवरी हो रही थी। लिहाजा स्टाफ ने महिला को वार्ड में ले जाने के बजाय ठेले पर ही गैलरी में रोक दिया।
सीएचसी की गैलरी में ठेले पर शिशु का जन्म देने की घटना बुधवार सुबह करीब सवा दस बजे की है। नगर का एक मजदूर पेशा युवक अपनी पत्नी को प्रसव पीड़ा होने पर बहनोई के ठेले से लेकर सीएचसी पहुंचा था। साथ में परिवार की दो महिलाएं भी थीं। गर्भवती को ठेले से पहले सीएचसी के पूर्वी गेट से ले जाने का प्रयास किया गया, लेकिन वहां ताला पड़ा था। परिवार के लोगों ने ताला खोलने के लिए स्टाफ को आवाज भी दी, लेकिन कोई नहीं पहुंचा। इसके बाद पश्चिमी गेट से ठेले को अंदर ले जाया गया। सीएचसी परिसर में स्ट्रेचर न मिलने पर उसे ठेेले से ही बरामदे से होते हुए प्रसव कक्ष की गैलरी में लाया गया। प्रसव कक्ष के बाहर खड़े स्टाफ व अ्न्य कुछ लोगों ने यह कहते हुए ठेला वहीं रुकवा दिया कि कक्ष में डिलीवरी हो रही है। लेकिन प्रसव पीड़ा से तड़प रही महिला ने कुछ देर बाद ठेले पर ही बच्चे को जन्म दे दिया। शोर-शराबे पर प्रसव के बाद सीएचसी स्टाफ मौके पर पहुंचा। तब महिला को ठेले से उठाकर प्रसव कक्ष में ले जाया गया। घरवालों ने बताया कि आशा वर्कर को सूचना दी गई थी। उससे ही एंबुलेंस बुलाने को कहा था, लेकिन जब काफी देर इंतजार के बाद भी न आशा वर्कर पहुंची और न एंबुलेंस तो मजबूरी में महिला को ठेले पर लेकर आना पड़ा।
इधर चार दिन के भीतर ही ठेले पर सीएचसी की गैलरी में बच्चे के जन्म की दूसरी घटना होने पर एमओआईसी डॉ. छत्रपाल सिंह आनन-फानन में जांच पूरी कर स्टाफ को क्लीन चिट दे दी।
ठेले पर गैलरी में शिशु को जन्म देने के मामले की जानकारी पर जांच की गई। जांच में प्रसूता की ओर से 102 एंबुलेंस को सीएचसी पहुंचने को सूचना न देेना पाया गया। महिला को देर से सीएचसी लाया गया। गैलरी में उसे रोका नहीं गया। देर से आने की वजह से गैलरी में ठेले पर ही प्रसव हुआ है। आशा वर्कर और सीएचसी स्टाफ की जांच में गलती नहीं पाई गई है।
- डॉ. छत्रपाल, एमओआईसी