बरेली। सावन की अमावस्या को हरियाली अमावस्या के नाम से भी जाना जाता है। रविवार को सिद्धि योग व रवि-पुष्य योग के संगम में हरियाली अमावस्या का पर्व मनाया जाएगा। इस दिन पितृ श्राद्ध, दान, हवन, पूजन व पौधरोपण करने से अक्षय फल की प्राप्ति होती है।
ज्योतिषाचार्य पंडित मुकेश मिश्रा के अनुसार रविवार को पुष्य नक्षत्र पड़ता है तो उसे रवि-पुष्य योग कहते हैं। इस योग में पूजा-पाठ से सभी मनोरथ सिद्ध होते हैं। साथ ही, सिद्धि योग अत्यंत मंगलदायक माना जाता है। अमावस्या तिथि शनिवार अपराह्न 3:50 बजे से ही शुरू हो गई है, लेकिन उदया तिथि की प्रधानता के कारण रविवार को ही अमावस्या मनाई जाएगी।
हरियाली अमावस्या पर शिव-पार्वती के पूजन से उनकी सदैव कृपा बनी रहती है। इस दिन शिव-पार्वती का पूजन करने वाली कन्याओं को इच्छित वर व सुहागिनों को अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है। जिनकी कुंडली में काल सर्पदोष, पितृदोष और शनि का प्रकोप है, वे हरियाली अमावस्या के दिन शिवलिंग पर जलाभिषेक करें।
पूजा विधि
सुबह स्नानादि से निवृत्त होकर भगवान सूर्य को अर्घ्य दें। लाल या पीला कपड़ा बिछाकर भगवान शिव और पार्वती की मूर्ति को विराजमान करें। अब महादेव का अभिषेक करें और बेलपत्र, धतूरा आदि अर्पित करें। देवी पार्वती को सोलह शृंगार की चीजें अर्पित करें। घी का दीपक जलाकर आरती करें और शिव मंत्रों का जप करें। खीर, फल व हलवे का भोग लगाकर प्रसाद वितरित करें। अंत में महादेव से जीवन में सुख-शांति की कामना करें और श्रद्धानुसार दान करना चाहिए।