यूपी का निजाम बदलते ही अफ सरों ने मुस्लिम बहुल इलाकों में करीब डेढ़ अरब रुपयों से हो रहे निर्माण कार्यों पर ब्रेक लगा दिया। हालांकि अभी तक प्रदेश में न तो सरकार बनी है और न ही किसी ने निर्माण पर रोक लगाने के विधिवत आदेश किए हैं। भावी सरकार की नीति और रुख को देखते हुए 11 मार्च को नतीजों के बाद अफसरों ने इस योजना के कामों पर चुप्पी साध ली और जल निगम निर्माण इकाई ने ठेकेदारों को निर्माण रोकने के बारे मे मौखिक आदेश कर दिए।
10 साल पहले मल्टी सेक्टोरियल डवलपमेंट योजना में 30 फीसदी से अधिक आबादी वाले जिलों को चयन करके वहां के अल्पसंख्यक बहुल इलाकों को बुनियादी सुविधाएं दिलाने के लिए बरेली का चयन हुआ था। तीन साल तो मुस्लिम बहुल इलाकों का सर्वे करने में निकल गए। सर्वे पूरा होने के बाद शिक्षा, चिकित्सा पेयजल, स्कूल कालेजों में शौचालय के निर्माण का खाका तैयार किया गया। निर्माण भी शुरू हो गया, उनमें से कई काम पूरे हो गए। कई काम शुरू हो गए लेकिन अब निजाम बदलने के कारण डेढ़ अरब के काम अधर में लटक गए। इनको फिर से शुरू कराने के लिए नई सरकार के गठन के बाद विधिवत निर्देश मिलने का इंतजार है।
ये हैं रुके काम
12 इंटर कालेज, दो पालिटेनिक, तीन आईटीआई 400 आंगनबाड़ी केंद्र। 15 गांवों में ओवर हैड टैंक और पेयजल योजना। प्रत्येक पेयजल योजना के लिए 3.5-3.5 करोड़ रुपये। छह-छह लाख रुपयों से 52 स्कूलों में अतिरिक्त कक्ष। 20 इंटर कालेजों में कंप्यूटर लैब, छह कस्तूरबा विद्यालयों में छह-छह लेट्रिन और बाथरूम। 150 विद्यालयों में शौचालय। फतेहगंज में यूनानी चिकित्सालय, रिठौैरा और शीशगढ़ में छह-छह करोड़ रुपयों से सीएचसी। रिछा में एक करोड़ रुपये से पीएचसी।
इन जगहों के कामों पर लगा ब्रेक
सेंथल, रिछा, शेरगढ़, शीशगढ़, शाही, ठिरिया निजावत खां, फतेहगंज पश्चिमी, भोजीपुरा, मथुरापुर । पुराने शहर के बाकरगंज, रबड़ी टोला, कसाई टोला, सैलानी, सूफी टोला, चक महमूद, नई बस्ती, गोंटिया, जखीरा, शहदाना, बड़ी बिहार, मलूकपुर, हजिापुर आजमनगर।