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Bareilly News: छरहरी काया की चाह में आधी आबादी पर बीमारियों की छाया

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छरहरी काया की चाहत में कई दिन भूखी रहने वाली महिलाओं की सेहत बिगड़ रही है। एक ओर बीमारियां घेर रहीं हैं तो दूसरी ओर एनोरेक्सिया नर्वाेसा जैसे डिसॉर्डर िी चपेट में आ रही हैं। मनोरोग विशेषज्ञ की काउंसलिंग में ये तथ्य सामने आए हैं।
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जिला अस्पताल की डाइटीशियन रोजी जैदी के मुताबिक, डाइटिंग के नाम पर भूखे रहने से शरीर को पोषक तत्व नहीं मिलते। इसकी भरपाई के लिए विटामिन डी सप्लीमेंट्स, मल्टीविटामिन टेबलेट्स, प्रोटीन पाउडर का सहारा लेती हैं। बिना जरूरत इनका सेवन शरीर के लिए नुकसानदेह होता है। क्रैश डाइट से शरीर का संतुलन बिगड़ रहा है। ज्यादा प्रोटीन से किडनी पर दबाव, पथरी का खतरा, विटामिन डी या ए की अधिकता से टॉक्सिसिटी (उल्टी, कमजोरी, हड्डियों में दर्द), मल्टीविटामिन के ओवरडोज से लीवर प्रभावित हो सकता है।
इसके अलावा मेटाबॉलिज्म प्रभावित होने और हार्मोनल असंतुलन समेत अन्य रोगों की चपेट में आने की आशंका रहती है। रोजी ने फिट रहने के लिए शॉर्टकट अपनाने से बचने का सुझाव दिया है।
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मनोचिकित्सक डॉ. आशीष कुमार के मुताबिक, ज्यादातर 25 से 45 वर्ष की युवतियां सिंड्रोम और मनोरोग की चपेट में आ रही हैं। इनमें ऐसी युवतियों की संख्या ज्यादा होती है, जिनका विवाह होने वाला है या जल्दी ही शादी के बंधन में बंधी हैं। जो मामले सामने आए हैं, उनमें वजन नियंत्रित था, लेकिन बढ़ने की आशंका के चलते भोजन से दूरी बना रही थीं।। नर्वोसा पीड़ित मामलों में भोजन सेवन के बाद उल्टी करने के मामले सामने आ रहे हैं। उनकी काउंसलिंग जारी है।

शुरुआती लक्षण और बचाव के उपाय
जिला अस्पताल के फिजिशियन डॉ. राहुल बाजपेई के मुताबिक, लंबे समय तक कम भोजन करने से कमजोरी, थकान, चक्कर आना, बालों का झड़ना, महिलाओं में अनियमित मासिक धर्म, मानसिक तनाव, हीमोग्लोबिन घटना, चिड़चिड़ापन आदि शुरुआती लक्षण होते हैं। रोग प्रतिरोधक क्षमता घटती है। क्रैश डाइट से बचने, संतुलित भोजन अपनाने, प्रोटीन के लिए दाल, दूध, अंडा प्राकृतिक स्रोतों को प्राथमिकता देने का सुझाव दिया है।

क्रैश डाइट : तेजी से वजन घटाने के लिए बेहद कम मात्रा में कैलोरी का सेवन।
एनोरेक्सिया नर्वोसा: वजन बढ़ने के डर से भोजन न करना। सप्ताह में कई दिन भूखे रहना या सामान्य से कम भोजन करना।
केस-1
आशियाना कॉलोनी निवासी 30 वर्षीय महिला दिन में सिर्फ एक बार बेहद कम भोजन कर रही थीं। शारीरिक समस्या बढ़ी तो इलाज के बजाय नजरंदाज कर दिया। पेट में दर्द हुआ तो परिजन जांच लिए अस्पताल पहुंचे। तब डिसॉर्डर का पता चला। काउंसलिंग से सेहत सुधरी।
केस-2
पुराना शहर निवासी 28 वर्षीय युवती करीब छह माह से लिक्विड डाइट पर थीं, भोजन नहीं कर रही थीं। परिजनों के समझाने पर भोजन करती थीं तो कुछ देर बाद उल्टी कर देती थीं। अल्ट्रासाउंड जांच में सब सामान्य मिला। मां ने मनकक्ष में संपर्क किया। अब काउंसलिंग जारी है।
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