- शहर की महिलाएं पुराने कपड़ों से बना रहीं हस्तनिर्मित थैलियां
बरेली। महाकुंभ 2025 में करोड़ों श्रद्धालुओं के आगमन के साथ स्वच्छता और पर्यावरण की सुरक्षा बड़ी चुनौती है। इससे निपटने के लिए एक थैला, एक थाली अभियान शुरू किया गया है। महाकुंभ जैसे बड़े आयोजनों में भारी मात्रा में प्लास्टिक कचरा एकत्र होता है, जो नदियों और पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा बनता है। एक थैला, एक थाली अभियान का उद्देश्य महाकुंभ को प्लास्टिक मुक्त बनाना है और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देना है। शहर की जरूरतमंद महिलाएं पुराने कपड़ों, बेकार चादरों और अन्य सामग्रियों से थैलियां बनाकर न केवल पर्यावरण संरक्षण का संदेश दे रहीं हैं, बल्कि आर्थिक रूप से सशक्त भी बन रहीं हैं।
समाजसेवी डॉ. मीनाक्षी चंद्रा जरूरतमंद महिलाओं से कपड़े के थैले तैयार करा रहीं हैं। वह बताती हैं कि उन्होंने 350 कपड़े के थैले तैयार कराए हैं, जिन्हें वह शहर की सामाजिक संस्थाओं को महाकुंभ में भेजने के लिए दे रहीं हैं। उनके यहां कार्य कर रहीं राम किशोरी ने बताया कि इसके माध्यम से उन्हें रोजगार भी मिल रहा है। वह प्रतिदिन 15-20 थैलियां बनाकर पैसा कमा रहीं हैं।
शहर की एक उम्मीद संस्था से जुड़ीं महिलाएं भी इस अभियान में बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहीं हैं। ये महिलाएं प्रतिदिन दर्जनों थैलियां तैयार कर रहीं हैं। इस अभियान के लिए अब तक वे 500 से अधिक थैले तैयार कर चुकी हैं और इसके माध्यम से रोजगार हासिल कर रहीं हैं।
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यह सिर्फ थैलियां बनाने का काम नहीं है, बल्कि पर्यावरण बचाने और स्वावलंबन को बढ़ावा देने की कोशिश है। हम चाहते हैं कि हर व्यक्ति प्लास्टिक के उपयोग से बचे और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार बने। - अमिता अग्रवाल, अध्यक्ष, एक उम्मीद संस्था
यह पहल न केवल पर्यावरण संरक्षण का उदाहरण है, बल्कि महिलाओं को सशक्त बनाने का एक माध्यम भी है। महाकुंभ को प्लास्टिक मुक्त बनाने में यह अभियान अहम भूमिका निभाएगा। - डॉ. मीनाक्षी चंद्रा, समाजसेवी
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