बरेली। महिला सशक्तीकरण को लेकर तमाम बातें होती हैं, इज्जतनगर की रहने वाली बबली ने अपने दम पर इसे जी कर दिखाया है। जीवन के उतार-चढ़ाव और सामाजिक दबाव के बीच बबली ने हार मानने के बजाय खुद को लोहे की तरह मजबूत बनाया। आज वह दूसरी महिलाओं के लिए प्रेरणास्रोत हैं।
करीब 13 साल पहले बबली का विवाह हुआ था, लेकिन पारिवारिक परिस्थितियों के चलते उनका रिश्ता टिक नहीं सका। पति से अलग होने के बाद शुभचिंतकों ने उन पर दूसरी शादी के लिए काफी दबाव बनाया। एक तरफ भविष्य की चिंता थी और दूसरी तरफ नन्ही बेटी माही। बबली ने अपनी बेटी की खातिर दूसरी शादी नहीं। अकेले ही उसकी परवरिश का फैसला किया।
मायके में रहने के दौरान भाई को देखकर बबली के मन में भी फिटनेस के प्रति रुचि जागी। उन्होंने न केवल अपनी शारीरिक क्षमता बढ़ाई, बल्कि इसे अपना कॅरिअर बनाने का संकल्प लिया। दो साल की कड़ी मेहनत और ट्रेनिंग के बाद उन्होंने खुद को एक पेशेवर जिम ट्रेनर के रूप में तैयार किया।
बनीं आत्मनिर्भरता की मिसाल
पिछले छह वर्षों से बबली एक सफल जिम ट्रेनर के रूप में कार्य कर रही हैं। अपनी मेहनत की बदौलत वह आज न केवल अपनी बेटी माही की पढ़ाई और परवरिश का खर्च खुद उठा रही हैं, बल्कि दर्जनों अन्य महिलाओं को फिट रहने के लिए प्रेरित भी कर रही हैं।