- जांच रिपोर्ट में 13 अधिकारियों के नाम हुए हैं उजागर, बुधवार को संबंधित कार्यालयों में पसरा रहा सन्नाटा
बरेली। बरेली-सितारगंज हाईवे और रिंग रोड के लिए भूमि अधिग्रहण में हुए घोटाले में दोषी ठहराए गए 13 अधिकारियाें, कर्मचारियों और अभियंताओं ने कानूनी सलाह के लिए दौड़ लगानी शुरू कर दी है। इनमें से कई अधिकारी छुट्टी पर भाग गए हैं। वहीं, कार्रवाई को लेकर संबंधित कार्यालयों में चर्चाएं भी तेज रहीं।
जांच टीम ने नौ मामलों में 21.52 करोड़ रुपये की घपलेबाजी पकड़ी है। रिपोर्ट के मुताबिक इन मामलों में एसएलएओ समेत लेखपाल, पीडब्ल्यूडी के अधिशासी अभियंता, एई, जेई व एनएचएआई के साइट इंजीनियर को दोषी माना गया है। जिला प्रशासन की ओर से दोषी पाए अधिकारियों, अभियंताओं व कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश करते हुए रिपोर्ट शासन को भेज दी गई है।
पीडब्ल्यूडी के तत्कालीन अधिशासी अभियंता (अब सेवानिवृत), सहायक अभियंता और अवर अभियंताओं के नाम आए हैं। जांच रिपोर्ट सार्वजनिक होने के बाद बुधवार को पीडब्ल्यूडी के कई अधिकारी कार्यालय ही नहीं पहुंचे। कर्मचारियों ने बताया कि सभी कार्यालय में तैनात हैं, पर कहां मिलेंगे पता नहीं। सहायक अभियंता स्नेहलता श्रीवास्तव छुट्टी पर हैं। एनएचएआई के प्रकरण की वजह से सब बचाव में लगे हैं। कर्मचारियों ने यह भी सुझाव दिया कि अगर कोई काम हो तो जल्द करा लो, क्योंकि मामले में कार्रवाई तय है।
इनके नाम आए हैं सामने
बरेली के एसएलएओ (विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी) आशीष कुमार, तत्कालीन एसएलएओ मदन कुमार, उनके कार्यालय के अमीन डंबर सिंह, नवाबगंज तहसील के लेखपाल सुरेश सक्सेना, सदर तहसील के लेखपाल उमाशंकर, पीडब्ल्यूडी के तत्कालीन अधिशासी अभियंता (अब सेवानिवृत) नारायण सिंह, सहायक अभियंता स्नेहलता श्रीवास्तव, अवर अभियंता राकेश कुमार, अंकित सक्सेना, सुरेंद्र सिंह, अमीन शिवशंकर, और एनएचएआई के साइट इंजीनियर रविंद्र गंगवार को मामले में दोषी पाया गया है। संवाद