कानपुर, दिल्ली की फर्मों के नाम पर हो रहा था फर्जीवाड़ा
प्रतिष्ठान पर उपलब्ध दस्तावेजों की जांच में पता चला कि रब जरी आर्ट फर्म पर प्रतिवर्ष करीब पांच करोड़ रुपये से ज्यादा माल की बिक्री की जा रही है, लेकिन कच्चे बिलों से बिक्री करते हुए मामूली राज्यकर जमा किया जा रहा है। यही नहीं जीएसटी देने से बचने के लिए कारोबारी दिल्ली और कानपुर की पंजीकृत फर्जी रैकेट वाली फर्मों के फर्जी बिल लगाकर राज्यकर समायोजित कर रहा था।
खुली पोल तो कारोबारी ने मांगी माफी
एसआईबी के छापा पर पहले कारोबारी ने काफी आपत्ति जताई पर जब जांच शुरू हुई और पोल खुलने लगी तो बैकफुट पर आ गया। कर चोरी स्वीकारते हुए माफी मांगने लगा। अधिकारियों के मुताबिक दस्तावेज और स्टॉक का मिलान किया गया। माल और प्रपत्र सीज किए गए।