दशहरा पर हर साल मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम के हाथों रावण का संहार होता है लेकिन इस बार दशहरा से पहले ही जीएसटी ने रावण का काम तमाम कर दिया है। जीएसटी की वजह से रावण के पुतलों को बनाने की लागत 25 फीसदी तक बढ़ गई है। रावण के पुतले बनाने वाले कारीगर इससे संकट में आ गए हैं। पुतलों के ग्राहक उन्हें बढ़ी हुई लागत देने को तैयार नहीं है। मोलभाव बढ़ गया है, लिहाजा उन्हें इस बार अपना मुनाफा घट जाने की आशंका सता रही है।
दशहरा पास आ चुका है, लिहाजा शहर में लगने वाले मेलों के लिए रावण, कुंभकरण और मेघनाद के पुतले बनाए जाने का काम युद्धस्तर जैसी तेजी पर पहुंच गया है। कारीगर पुतलों को अंतिम रूप देने में जुटे हैं, लेकिन इस बार उन पर मायूसी छाई हुई है। दरअसल जीएसटी की वजह से पुतलों के निर्माण में काम आने वाली कई चीजों के दाम बढ़ गए हैं। पुतलों के निर्माण पर पहले से ज्यादा लागत आ रही है, लेकिन मेलों के आयोजक उनसे मोलभाव में जुटे हुए हैं।
जोगीनवादा में लगने वाले मेले के लिए पुतलों को निर्माण कर रहे गौतम गिरि 60 फीट का रावण और 40-40 फीट के कुंभकरण और मेघनाद के पुतले बना रहे हैं। उनके साथी तेजपाल भी इस काम में लगे हुए हैं। गौतम ने बताया कि पुतले बनाने में अब ज्यादा पैसे लग रहे हैं। बताया, बांस, सुतली, कागज, गोटा, तामड़ा अबरी आदि सभी चीजों पर दाम बढ़ गए हैं। कहते हैं गोटा अबरी पर 50 रुपये रिम और तामड़ा पर चालीस रुपये प्रति रिम तक पैसे बढ़ गए हैं। कागज भी दाम पकड़ गया है। कुल मिलाकर करीब 20-25 फीसदी तक लागत बढ़ गई है। उन्हें इतनी लागत बढ़ जाने का अंदाजा नहीं था।
...मगर कारोबारी उठा रहे फायदा
रामलीला मेलों के लिए पुतले बनाने की ज्यादातर चीजों के दाम बढ़ गए हैं। पुतले बनाने वाले कारीगरों का कहना है कि जीएसटी लागू होने के बाद कुछ चीजों की कीमत घटी भी है, लेकिन उसका फायदा उन्हें नहीं मिल रहा है। पूरा फायदा कारोबारी उठा रहे हैं। कारीगरों ने बताया कि जिस पुतले को बनाने में उनकी लागत पिछली बार 35 हजार आ रही थी, वही अब 40-42 हजार के पार हो गई है। कुल मिलाकर उन्हें काफी नुकसान हो रहा है।