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जीआरपी थाना गोलीकांड: बरेली में पुलिसकर्मी दो दिन तक दबाए रहे घटना, सीओ बोले- साजिश नहीं, यह सिर्फ हादसा

Fri, 05 Sep 2025 12:19 PM IST
मुकेश कुमार संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली

सार

जीआरपी थाने में हुए गोलीकांड के बाद अधिकारी पुलिसकर्मियों के बचाव में उतर आए हैं। वह लापरवाही तो मान रहे हैं, लेकिन पार्टी की बात से इनकार कर रहे हैं। उन्हें यह भी नहीं पता कि दो गोलियां कितनी पिस्टल से चलीं?
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जीआरपी थाने में फॉरेंसिक टीम ने की जांच - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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बरेली जंक्शन के जीआरपी थाने में पार्टी के दौरान पुलिसकर्मियों में झगड़ा हो गया। इसके बाद दो राउंड फायरिंग हुई। फायरिंग में इंस्पेक्टर और एक सिपाही घायल हो गए। 
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दो दिन तक पुलिसकर्मी इस मामले को दबाए रहे। हवालात में बैठाए गए तीन आरोपियों ने बृहस्पतिवार को इसका खुलासा किया तो अधिकारी हरकत में आए। जीआरपी थाना प्रभारी परवेज अली खान समेत चार पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया। स्कॉर्ट ड्यूटी बदलने के दौरान गोली चलने की बात कही जा रही है। अधिकारी पुलिसकर्मियों की लापरवाही तो मान रहे हैं, लेकिन पार्टी की बात से इनकार कर रहे हैं। 

जीआरपी थाने के सिपाही और दरोगाओं का अलग-अलग जगह तबादला हुआ था। थाने में पुलिसकर्मियों ने मंगलवार की रात पार्टी रखी थी। पार्टी के दौरान जीआरपी के सिपाहियों के बीच झगड़ा हुआ। आरोप है कि झगड़े के दौरान ही सिपाहियों ने एक-दूसरे को लक्ष्य कर दो राउंड फायरिंग की। संयोग अच्छा था कि कोई हताहत नहीं हुआ। सिर्फ इंस्पेक्टर परवेज और सिपाही छोटू मामूली रूप से घायल हो गए। मामले की सूचना अधिकारियों को भी दी गई, लेकिन किसी ने इसे उजागर नहीं किया। 
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यह भी पढ़ें- जीआरपी गोलीकांड: 'एक गोली दो हिस्सों में बंटी, एक सिपाही को लगा... दूसरे से इंस्पेक्टर घायल'; सीओ का अजब तर्क

मंगलवार को जीआरपी थाने की हवालात में पहले से तीन आरोपी बैठाए गए थे। वह बाहर आए तो उन्होंने घटना के बारे में सबको बताया। बृहस्पतिवार को मामले ने तूल पकड़ा तो जीआरपी मुरादाबाद अनुभाग के कार्यवाहक एसपी रोहित मिश्रा ने इंस्पेक्टर परवेज अली खान और सिपाही छोटू, मनोज व मोनू को निलंबित कर दिया। मामले की जांच गाजियाबाद के सीओ जीआरपी को सौंपी गई है।
 

गोलीकांड के बाद अधिकारी पुलिसकर्मियों के बचाव में उतर आए हैं। वह लापरवाही तो मान रहे हैं, लेकिन पार्टी की बात से इनकार कर रहे हैं। उन्हें यह भी नहीं पता कि दो गोलियां कितनी पिस्टल से चलीं? यह हाल तब है जबकि इंस्पेक्टर से लेकर मुंशी तक निलंबित कर दिए गए हैं। सीओ ने कहा कि यह हादसा है, इसमें कोई साजिश नहीं है। 

घायल सिपाही का भी नहीं बता सके नाम
सीओ अनिल से पूछा गया कि गोली किस सिपाही को लगी तो उन्होंने मनोज का नाम बता दिया, जबकि छोटू को गोली लगी थी। हालांकि, बाद में उन्होंने अपनी जानकारी दुरुस्त की। उन्हें मुंशी का नाम भी नहीं पता था। थाना स्टाफ की ओर से घटना को छिपाने के बाबत पूछने पर उन्होंने खुद ही सफाई दे डाली।

कहा कि अगले दिन शाम पांच बजे इंस्पेक्टर अस्पताल से आए तो उन्हें घटना की जानकारी दी। इस पर सवाल किया कि जहां इलाज हुआ, वहां से किसी ने पुलिस को जानकारी क्यों नहीं दी? अन्य स्टाफ ने क्यों नहीं बताया? तब उन्होंने कहा घटना को दबाने की बात को दबी जुबान से स्वीकार कर लिया।
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दो हिस्सों में हुई गोली, एक टुकड़ा इंस्पेक्टर तो दूसरा सिपाही को लगा
सीओ अनिल के मुताबिक इंस्पेक्टर व सिपाही को दूसरी बार चली गोली लगी है। मुंशी के हैमर रिलीज करने के प्रयास के दौरान जो फायर हुआ, वह गोली कार्यालय के स्लैब पर लगकर दो भागों में बंट गई। इसका एक टुकड़ा यूपीएस से टकराकर सिपाही की भौंह पर लगा और दूसरा टुकड़ा कंप्यूटर के केबल से टकराकर इंस्पेक्टर की ओर घूम गया। यह उनकी नाक के आर-पार हुआ है।

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