बरेली। प्रभु यीशु के जी उठने की खुशी में रविवार को ईस्टर मनाया जाएगा। इससे पहले शनिवार को शांत दिवस के रूप में मनाया गया। दिनभर अपने-अपने घरों और समूह में लोग प्रार्थना करते रहे। इसमें गीत, भजन, बाइबिल पाठ और मनन-चिंतन किया गया। रात को चर्च में भी प्रार्थना सभाएं आयोजित की गईं। रविवार को सभी चर्चों में ईस्टर की विशेष आराधना सुबह नौ से दस बजे के बीच होगी। इससे पहले सभी जलती कैंडल लेकर चर्च पहुंचेंगे। नवजातों का नामकरण संस्कार होगा।
क्राइस्ट मैथोडिस्ट चर्च के मुख्य पादरी रेव्ह. सुनील मसीह ने बताया कि शनिवार का दिन प्रभु यीशु की मृत्यु के बाद का समय है, जब उनके शरीर को कब्र में रखा गया था। यह दिन शांति और आने वाले पुनरुत्थान की आशा का प्रतीक है।